30 अक्टूबर तक जवाब तलब, केएपी सिन्हा से सुप्रीम कोर्ट में अपील की स्थिति पर मांगा स्पष्टीकरण
चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा की ओर से पहले दाखिल हलफनामे में कथित तौर पर गलत जानकारी दिए जाने के मामले में अदालत ने आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने से पहले सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए 30 अक्टूबर या उससे पहले की समयसीमा तय की है।
सुनवाई के दौरान चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। जस्टिस विनोद भारद्वाज ने उनसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) की स्थिति के बारे में पूछा। इस पर सिन्हा ने कहा कि वह संबंधित वकील से जानकारी लेकर याचिका की स्थिति पर हलफनामा दाखिल करेंगे। उन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई के संबंध में जवाब देने के लिए भी समय मांगा।
करीब 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को बकाये का इंतजार
कर्मचारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल ने अदालत को बताया कि करीब 8 लाख कर्मचारी और पेंशनर बकाया DA मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुनवाई सूचीबद्ध नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि लाखों कर्मचारियों के आर्थिक हितों से जुड़े मामले में सुनवाई में देरी क्यों हो रही है।
कर्मचारियों के पक्ष ने यह भी दलील दी कि सरकार ने अन्य मामलों में हाईकोर्ट के फैसलों को चुनौती देने के लिए तेजी दिखाई, जबकि DA बकाये से जुड़ी अपील पर अब तक सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है।
सरकार ने पिछली सरकारों के कार्यकाल का बताया बकाया
पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि कर्मचारियों का बकाया मौजूदा सरकार के कार्यकाल से संबंधित नहीं, बल्कि पिछली सरकारों के समय का है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि फैसला सुनाने से पहले अदालत मामले के रिकॉर्ड की जांच कर चुकी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है, लेकिन अपील के संबंध में अदालत के समक्ष गलत जानकारी देना स्वीकार्य नहीं है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील की कमियां अब तक दूर नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए।
आरएस चीमा नियुक्त हुए एमिकस क्यूरी
मामले में हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। वह कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर अदालत की सहायता करेंगे। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की पीठ ने मामले को नियमित अवमानना से आपराधिक अवमानना के दायरे में लाने का निर्णय लिया था।
अब मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। अदालत में दाखिल जवाब और सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील की स्थिति आगे की कार्यवाही के लिए महत्वपूर्ण होगी।
