डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों भी पार्टी में शामिल; मजीठिया और भोला ड्रग रैकेट समेत कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच से जुड़े रहे हैं निरंजन सिंह
जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने बुधवार को चंडीगढ़ में सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़ी पार्टी ‘वारिस पंजाब दे’ की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ने की घोषणा की। उनके साथ पूर्व डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों ने भी पार्टी की सदस्यता ली। दोनों ने खडूर साहिब से अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन की।
31 मई 2021 को हुए थे रिटायर
निरंजन सिंह लंबे समय तक ईडी के जालंधर कार्यालय में तैनात रहे। उन्होंने 2018 में ईडी छोड़ने का फैसला किया था, लेकिन बाद में अपने कार्यकाल में बने रहे। आधिकारिक तौर पर वे 31 मई 2021 को सेवानिवृत्त हुए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच की।
मजीठिया मामले की जांच से जुड़े रहे
निरंजन सिंह ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया और सरवन सिंह फिल्लौर समेत कई नेताओं से पूछताछ की थी। मजीठिया मामले की जांच के दौरान उनका जालंधर से कोलकाता तबादला किया गया था। सिंह ने इस तबादले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद अदालत ने संबंधित फैसला रद्द कर दिया था।
राजा कंदोला केस से भोला ड्रग रैकेट तक
निरंजन सिंह ड्रग तस्कर राजा कंदोला से जुड़े मामले की जांच से भी जुड़े रहे। ईडी ने 2012 में राजा कंदोला के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच आगे बढ़ने पर कथित ड्रग नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच हुई। इसी क्रम में 2013 में पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसे बाद में भोला ड्रग रैकेट से जोड़ा गया।
‘मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं’
पार्टी में शामिल होने के कारणों पर निरंजन सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में नशे के खिलाफ काम किया है। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं और राजनीति में आने की उनकी पहले इच्छा भी नहीं थी।
उन्होंने कहा कि समाज में सवाल पूछने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है और लोग कई बार अपने व्यक्तिगत नफा-नुकसान तक सीमित रह जाते हैं।
नशे और भ्रष्टाचार पर जवाबदेही की बात
निरंजन सिंह ने कहा कि पंजाब में भ्रष्टाचार और नशे जैसे मुद्दों पर राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके अनुसार, लोगों को व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर व्यवस्था से सवाल पूछने चाहिए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में लोगों को चुप रहने के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और नशे तथा भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जवाबदेही की मांग करनी होगी।
