हिमाचल प्रदेश जनरल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक नियुक्त; शिमला में दर्ज दो FIR के बीच नई तैनाती चर्चा में
एएम नाथ। शिमला। हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव गांधी एक बार फिर तबादले को लेकर चर्चा में हैं। करीब नौ महीने के भीतर पांचवीं बार उनकी तैनाती बदली गई है। ताजा आदेशों के अनुसार, उन्हें हिमाचल प्रदेश जनरल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड, शिमला का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है।
लगातार बदलती जिम्मेदारियों और हाल ही में शिमला सदर पुलिस थाने में उनके खिलाफ दर्ज दो एफआईआर के चलते उनकी नई नियुक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, तबादलों के पीछे के कारणों को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।
पहले भी अलग-अलग पदों पर हुई तैनाती
इससे पहले संजीव गांधी को हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, कांगड़ा के प्रबंध निदेशक पद पर तैनात करने के आदेश जारी हुए थे। इसके अलावा उन्हें हिमलैंड में निदेशक पद पर भी नियुक्त किया गया था। कम समय में अलग-अलग संस्थानों और पदों पर उनकी तैनाती प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
दो एफआईआर में वित्तीय लेनदेन को लेकर आरोप
संजीव गांधी के खिलाफ शिमला सदर पुलिस थाने में दर्ज दो एफआईआर भी चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन मामलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और पुलिस विभाग के लिए उपलब्ध धनराशि के इस्तेमाल को लेकर आरोप लगाए गए हैं।
पहले मामले में आरोप है कि एक कांस्टेबल से कुछ खर्च करवाया गया, लेकिन संबंधित राशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायत के आधार पर वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। हालांकि, खर्च, भुगतान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी।
सरकारी आवास पर धन खर्च करने के आरोप की भी जांच
दूसरे मामले में आरोप लगाया गया है कि पुलिस थानों और अन्य विभागीय जरूरतों के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के बजाय सरकारी आवास पर खर्च के लिए किया गया। शिकायत में भवनों और कर्मचारियों के आवासों की मरम्मत के लिए आवंटित राशि के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है। धनराशि के आवंटन, खर्च के बिलों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, एफआईआर में लगाए गए आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता।
फोटो कैप्शन: वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव गांधी की नई तैनाती के आदेशों के बाद तबादलों और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामला चर्चा में है।
