LPG की छुट्टी : चूल्हे में जलेगा अब एथेनॉल, महंगे सिलेंडर से मिलेगी आजादी

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नई दिल्‍ली. भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई में आने वाली बाधाएं अक्सर होटल, रेस्टोरेंट और बड़े संस्थानों के लिए सिरदर्द बनी रहती हैं. लेकिन अब इस संकट का एक स्वदेशी और टिकाऊ समाधान निकालने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं।

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) का इस्तेमाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि यह योजना जमीन पर उतरती है तो आने वाले समय में कमर्शियल किचन से एलपीजी सिलेंडरों की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है. लगभग 1,000 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता को कुकिंग के लिए यूज में लाने की योजना है. आने वाले हफ्तों में इस पर एक विस्तृत व्हाइट पेपर अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने पेश किया जा सकता है।

एलपीजी से सस्‍ता है एथेनॉल

एथेनॉल, खासकर हाइड्रस एथेनॉल कमर्शियल एलपीजी के मुकाबले सस्ता पड़ सकता है. इसमें लगभग 95% एथेनॉल और थोड़ा पानी होता है. इस वजह से इसे अतिरिक्त डीहाइड्रेशन प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता और इसकी लागत कम रहती है. कमर्शियल एलपीजी की कीमत लगभग ₹103 प्रति किलोग्राम है, जबकि हाइड्रस एथेनॉल करीब ₹70 प्रति किलोग्राम पड़ता है. हालांकि, एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता एलपीजी से कम होती है. इसका मतलब है कि एथेनॉल की ज्यादा मात्रा की जरूरत पड़ती है।

किससे बनता है एथेनॉल?

भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और टूटे हुए चावल से बनता है. इसका इस्‍तेमाल एक बायोफ्यूल के रूप में किया जाता है. भारत में अब एथेनॉल युक्‍त पेट्रोल की बिक्री होती है. कुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल मिश्रण ईंधन वाले एथेनॉल से अलग होता है और सस्ता भी है।

क्‍या है सरकार की योजना?

एक सूत्र ने बताया कि सरकार की योजना शुरुआत में व्‍यावसायिक संस्‍थानों जैसे होटल, एयरपोर्ट और रेस्टोरेंट में एथेनॉल का इस्‍तेमाल खाना बनाने में करने की है. अमेरिका ईरान-युद्ध की वजह से एलपीजी आयात बाधित हुआ है और इस वजह से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता कम हुई है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल संस्थानों को कम एलपीजी की आपूर्ति हो रही है।

कमर्शियल कुकिंग के लिए एथेनॉल (Ethanol) के इस्तेमाल के प्रस्ताव को एक अंतर-मंत्रालयी पैनल के सामने रखा जाएगा. इस पैनल में पेट्रोलियम, सड़क परिवहन, भारी उद्योग और खाद्य मंत्रालय के अधिकारी शा‍मिल हैं. यही पैनल एथेनॉल से जुड़े नीतिगत फैसले लेता है. सूत्रों के अनुसार, उद्योग के प्रतिनिधियों ने ट्रायल शुरू करने और सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा व तकनीकी मानक विकसित करने की इच्‍छा जताई है. इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

भारत के पास सरप्‍लस है एथेनॉल

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल भारती बालाजी का कहना है कि देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है. पेट्रोल में 20% ब्लेंडिंग लक्ष्य पूरा करने के बाद भी लगभग 1,000 करोड़ लीटर का सरप्‍लस बचता है. एथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY), जो नवंबर से अक्टूबर तक चलता है के दौरान 28 फरवरी तक 353 करोड़ लीटर से ज्यादा एथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जा चुका है. बालाजी ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में भारत ने एथेनॉल उत्पादन क्षमता में करीब 40,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है. वर्तमान में लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए चाहिए. उत्‍पादन 2000 करोड़ लीटर होने से करीब 1,000 करोड़ लीटर एथेनॉल देश के पास सरप्‍लस है।

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