Video देख फट जाएगा कलेजा : सब को माफ करते हुए…हरीश राणा की इच्छा मृत्यु का भावुक पल

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केभी-कभी जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करती है, जहां उम्मीद और दर्द के बीच की रेखा धुंधली पड़ जाती है. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले एक परिवार ने पिछले 13 साल इसी दर्द और उम्मीद के बीच गुजारे।

उनका बेटा पिछले 13 सालों से पलंग पर है और एक जिंदा लाश बनकर जी रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने उसे इच्छा मृत्यु देने का फैसला लिया है लेकिन उससे पहले हरीश जिसे इच्छा मृत्यु दी जानी है, का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसने सभी को रुला दिया है. वीडियो में हरीश को इच्छा मृत्यु देने से पहले के कुछ भावुक पल हैं।

सब को माफ करते हुए, वायरल वीडियो देख कांप उठेगी आत्मा :  दरअसल, सोशल मीडिया पर हरीश को इच्छा मृत्यु देने से पहले का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक महिला हरीश के सिर पर हाथ फैरते हुए उससे कह रही है कि सभी को माफ करते हुए और सब से माफी मांगते हुए जाओ. ये पल इतना इमोशनल है कि वीडियो ने लोगों को रुला दिया है. इस दौरान हरीश भी कुछ कहने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है लेकिन हालात उसके कंट्रोल से बाहर हैं. जबान हिलाने की कोशिश की जा रही है लेकिन कंडिशन ऐसी है कि शरीर आवाज को बाहर ही नहीं आने दे रहा है।

भयानक हादसे ने बदल दी जिंदगी

आपको बता दें कि हरिश राणा, जो कभी एक होनहार इंजीनियरिंग छात्र था, एक भयानक हादसे के बाद ऐसी हालत में पहुंच गया जहां वह न बोल सकता था, न चल सकता था और न ही अपने आसपास की दुनिया को समझ पा रहा था. डॉक्टरों की भाषा में इसे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट कहा जाता है. 13 साल तक मशीनों और मेडिकल सपोर्ट के सहारे जिंदा रहे हरिश की जिंदगी अब एक ऐसे फैसले के मोड़ पर पहुंच गई है जिसने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी हालत को देखते हुए पैसिव यूथेनेशिया यानी जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति दे दी है. यह फैसला न सिर्फ एक परिवार के लिए बेहद दर्दनाक है बल्कि भारत में जीवन के अंतिम चरण से जुड़े कानूनों के लिए भी एक अहम मिसाल बन गया है।

13 साल का लंबा दर्द और इंतजार

हरिश राणा पिछले करीब 13 साल से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे. यानी उनका शरीर जिंदा था लेकिन दिमाग लगभग निष्क्रिय स्थिति में था. इस दौरान उनका पूरा जीवन मेडिकल सपोर्ट और ट्यूब के सहारे चल रहा था. परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन रहा. पिता ने कहा कि हमने 4588 दिन इस दर्द के साथ बिताए हैं, लेकिन अपने बेटे के जीवन रक्षक उपकरण हटाने का फैसला लेना उससे भी ज्यादा मुश्किल है।

सुप्रीम कोर्ट ने दी पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति

मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हरिश राणा के मामले में पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी. अदालत ने कई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और परिवार की सहमति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरिश को दिल्ली के एम्स के पेलिएटिव केयर विभाग में भर्ती किया जाए और वहां उनके जीवन के अंतिम चरण की देखभाल के लिए पूरा प्लान तैयार किया जाए।

अब हटाए जाएंगे जीवन रक्षक उपकरण

डॉक्टरों के मुताबिक कोर्ट के आदेश के बाद अब धीरे-धीरे हरिश के जीवन रक्षक उपकरण हटाए जाएंगे. इस प्रक्रिया को बेहद संवेदनशील और मानवीय तरीके से किया जाएगा ताकि मरीज की गरिमा बनी रहे. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीईजी ट्यूब के जरिए दिया जाने वाला पोषण भी मेडिकल ट्रीटमेंट की श्रेणी में आता है और इसे हटाना पैसिव यूथेनेशिया के दायरे में माना जाएगा.

वीडियो देख रोया पूरा इंटरनेट

वीडियो को बहुत लोगो ने आपने आपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…यह देखकर कलेजा फट गया. एक और यूजर ने लिखा….वीडियो देखकर मेरे आंसू नहीं रुक रहे हैं. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा….ये एक बेटे की जान नहीं जा रही है, साथ में मां बाप के दिल पर भी पत्थर पड़ रहे हैं।

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