एआई और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों से उच्च शिक्षा को भविष्य के अनुरूप बनाएगा हिमाचल: रोहित ठाकुर

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राज्य उच्च शिक्षा परिषद की बैठक में अनुसंधान, खेल, कौशल विकास और विद्यार्थी सहायता प्रणाली मजबूत करने पर बल

एएम नाथ।  शिमला। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप, कौशल आधारित और तकनीक संचालित बनाने के लिए व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों, उभरती तकनीकों, अनुसंधान, खेल और विद्यार्थियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

रोहित ठाकुर ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की 9वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल वर्तमान रोजगार अवसरों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों, तकनीकों और चुनौतियों के लिए भी तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और शिक्षण संस्थानों को अधिक से अधिक आधुनिक, व्यावसायिक और रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही मौजूदा पाठ्यक्रमों को बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप समय-समय पर अपडेट करने पर भी जोर दिया।

मौजूदा विषयों से जोड़ी जाए एआई

शिक्षा मंत्री ने कहा कि एआई अब भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान में ही काम करने और सीखने के तरीकों को बदल रही है। इसलिए विद्यार्थियों को इसके अवसरों और इससे जुड़ी चुनौतियों के लिए तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि एआई को केवल विशेष पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि जहां संभव हो, इसे मौजूदा विषयों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ जोड़ा जाए। कृषि एवं बागवानी में एआई आधारित खेती और डेटा विश्लेषण, जबकि पर्यटन में डिजिटल और एआई आधारित सेवाओं को शामिल किया जा सकता है।

इसी तरह वानिकी, आपदा प्रबंधन, जलवायु अध्ययन, स्वास्थ्य सेवाओं, योग एवं वेलनेस, शिक्षा, कानून, वित्तीय साक्षरता, सामाजिक कार्य, मनोविज्ञान, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, खेल, आतिथ्य, रचनात्मक कला, डिजाइन, संगीत, उद्यमिता और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए।

साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों पर फोकस

रोहित ठाकुर ने साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, ड्रोन तकनीक, जीआईएस, डिजिटल मार्केटिंग और उद्यमिता जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रमों की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा। उन्होंने कहा कि नए पाठ्यक्रम राज्य की जरूरतों और रोजगार बाजार की मांग को ध्यान में रखकर तैयार किए जाने चाहिए।

खेल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर

शिक्षा मंत्री ने शिक्षण संस्थानों में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पोर्ट्स साइंस, फिटनेस, पोषण और स्पोर्ट्स मैनेजमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को रोजगार बाजार में बदलाव का इंतजार नहीं करना चाहिए। भविष्य की चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाकर युवाओं को उनके लिए तैयार करना होगा।

हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े अनुसंधान को बढ़ावा

रोहित ठाकुर ने हिमाचल और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। इनमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन, कृषि, बागवानी और सतत विकास जैसे विषय शामिल हैं।

उन्होंने अनुसंधान के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित करने, अधिक अनुदान उपलब्ध करवाने और नवाचार एवं स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। साथ ही इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की बात कही।

विद्यार्थियों को शैक्षणिक और मानसिक सहयोग देने पर जोर

शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों की आकांक्षाओं और चिंताओं को समझने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी बात रखने और सहयोग प्राप्त करने के लिए उचित संस्थागत मंच उपलब्ध करवाए जाने चाहिए।

उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में काउंसलिंग और विद्यार्थी सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन और समग्र व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यों की समीक्षा

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान/प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करने के निर्देश दिए।

उन्होंने एचपीएसएचईसी की नियमित बैठकें आयोजित करने पर भी जोर दिया, ताकि लिए गए निर्णयों की समय-समय पर समीक्षा की जा सके।

रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी रहा है और अब राज्य को आधुनिक, नवाचारपूर्ण तथा तकनीक संचालित शिक्षा व्यवस्था की दिशा में अगला कदम उठाना होगा।

बैठक में एचपीएसएचईसी के अध्यक्ष डॉ. सरबजोत सिंह बहल, सचिव शिक्षा राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह, परिषद के सदस्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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