खालसा टैक्स को लेकर पंजाब व हिमाचल प्रदेश : सीएम खालसा एंट्री टैक्स को गैर कानूनी बताते हुए सीएम भगवंत मान से मामले पर कार्रवाई की मांग की

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एएम नाथ : शिमला / चंडीगढ़ : हिमाचल प्रदेश में बाहर की गाड़ियों से एंट्री टैक्स लेने के जवाब में चण्डीगढ़-मनाली हाईवे पर कीरतपुर में निहंगों के खालसा टैक्स शुरू करने के विवाद में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज पंजाब सीएम भगवंत मान से की बात कर सीएम सुक्खू ने खालसा एंट्री टैक्स को गैर कानूनी बताया और भगवंत मान से मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। हिमाचल के कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि खालसा टैक्स गैर कानूनी है। ये अकाली दल और भाजपा की सोची समझी साजिश है। जब भी टूरिस्ट सीजन शुरू होता है तो इस तरह की हरकत की जाती है। पहले कसोल में टूरिस्ट ने गोली चलाई और उसके बाद बॉर्डर पर से सब शुरू किया गया।

उधर, खालसा टैक्स विवाद के बीच कांगड़ा के ज्वाली से पूर्व कांग्रेस विधायक नीरज भारती ने निहंगों का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर हिमाचल सरकार के पास पैसे नहीं हैं तो बाहर से आने वाले लोगों को स्टेट एंट्री टैक्स के नाम पर परेशान करने की बजाय प्रदेश के ही लगभग 70 लाख हिमाचलियों से 10-10, 15-15 हजार रुपए का दान (भीख) मांग लेना चाहिए। शायद 40-50 लाख लोग दे भी दें, जिससे सरकारी खजाना ज्यादा जल्दी भर जाए, क्योंकि आज अगर बाहर से आने वालों को परेशान करेंगे तो कल हिमाचल के लोगों को भी दूसरे राज्यों में उसी नजर से देखा जाएगा। मैं खालसा भाइयों का समर्थन करता हूं जब हिमाचल प्रदेश में बाहर की गाड़ियों से एंट्री टैक्स लिया जा सकता है तो फिर देश के हर राज्य को भी हिमाचल प्रदेश के वाहनों से एंट्री टैक्स लेना चाहिए।

पंजाब में निहंगों ने हिमाचल सरकार के एंट्री टैक्स के विरोध में बुधवार को पंजाब में हिमाचल प्रदेश की गाड़ियों से खालसा टैक्स वसूला गया। कीरतपुर में निहंगों ने हिमाचल नंबर की गाड़ियों को रोककर सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक खालसा टैक्स काटा गया। निहंग सिंहों का कहना था कि हिमाचल नंबर वाले वाहनों से किसी प्रकार का अनिवार्य शुल्क नहीं लिया जा रहा, बल्कि वाहन चालक अपनी इच्छा से जो भी राशि देना चाहते हैं, उसे स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन चालक पर कोई दबाव नहीं बनाया और पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक सहयोग के आधार पर चली। उनका कहना था कि इस राशि का उपयोग सरबत के भले और सामाजिक कार्यों में किया जाएगा। व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली नीतियों का विरोध किया जाना जरूरी है। हालांकि बाद में पंजाब पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद दोपहर बाद यह टैक्स लेना बंद किया गया।

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