रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल इमारतें बनाने और मंजूरी की शर्तों को दरकिनार करने के आरोप; विकास मंच ने विजिलेंस जांच की मांग उठाई
नोटिस जारी होने के बाद कार्रवाई कहां तक पहुंचती है, जांच का विषय;
ईओ बोले—शिकायत और संज्ञान में आने वाले मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है
गढ़शंकर। शहर में कथित अवैध निर्माणों और बिना जरूरी मंजूरी के विकसित की जा रही कॉलोनियों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। नगर कौंसिल के अधिकार क्षेत्र में रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल इमारतें बनाने, स्वीकृत नक्शों के विपरीत निर्माण करने और बिना आवश्यक मंजूरियों के प्लॉट बेचने के आरोप सामने आ रहे हैं। इन मामलों में नगर कौंसिल की कार्रवाई की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए तो नियमों के उल्लंघन तथा संबंधित विभागों की भूमिका से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।
शहर में आरोप हैं कि कुछ कॉलोनाइजर जमीन खरीदकर बिना जरूरी मंजूरियां लिए प्लॉट बेच देते हैं। बाद में अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदने वाले लोगों को निर्माण की अनुमति लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में सड़क, पानी के कनेक्शन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने में भी दिक्कत आती है। दूसरी ओर, शहर में कुछ निर्माणों को लेकर आरोप हैं कि रिहायशी उपयोग के लिए मंजूरी लेने के बाद उनका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगता है। कहीं स्वीकृत नक्शे की शर्तों के विपरीत निर्माण होने की शिकायतें हैं तो कहीं बिना मंजूरी के निर्माण कार्य किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
नोटिस के बाद कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि नगर कौंसिल द्वारा अवैध निर्माणों के संबंध में नोटिस जारी किए जाने के बाद कार्रवाई किस स्तर तक पहुंचती है। आरोप हैं कि कई मामलों में नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहते हैं और आगे की कार्रवाई में देरी होती है। यदि किसी निर्माण के खिलाफ शिकायत मिलने या मामला मीडिया में आने के बाद ही कार्रवाई शुरू होती है, तो इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
शहर के पुराने बाजार में रिहायशी मंजूरी लेकर कमर्शियल निर्माण किए जाने और चंडीगढ़ चौक के नजदीक कथित तौर पर बिना मंजूरी निर्माण कार्य चलने के मामले भी चर्चा में हैं। इन मामलों में संबंधित मंजूरियों, स्वीकृत नक्शों, जारी नोटिसों और उसके बाद की गई कार्रवाई की जांच जरूरी मानी जा रही है। अगस्त 2026 में बीरमपुर रोड पर एक कॉलोनी के बाहर उसे अनधिकृत बताते हुए बोर्ड लगाए जाने का मामला भी सामने आया था। उस समय नगर कौंसिल के कार्यकारी अधिकारी ने बोर्ड लगवाने से इनकार करते हुए मौके पर जाकर जांच करने की बात कही थी।
कमर्शियल इमारतों की मंजूरी के दौरान सड़क की चौड़ाई, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़ी शर्तें भी महत्वपूर्ण होती हैं। यदि निर्माण के दौरान इन शर्तों का पालन नहीं किया जाता, तो इसका असर यातायात व्यवस्था और स्थानीय निवासियों की सुविधाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि संबंधित निर्माणों को कौन-सी मंजूरी दी गई, मौके पर निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है या नहीं और उल्लंघन पाए जाने पर क्या कार्रवाई की गई।
कॉलोनाइजरों पर लोगों को गुमराह करने के आरोप
शहर में कुछ कॉलोनाइजरों पर आरोप हैं कि वे लोगों को कॉलोनी मंजूर होने या भविष्य में मंजूरी दिलवाने का भरोसा देकर प्लॉट बेचते हैं। कुछ खरीदारों को यह आश्वासन भी दिया जाता है कि निर्माण के लिए जरूरी मंजूरियां उपलब्ध करवा दी जाएंगी। आरोप है कि प्लॉट बेचने के लिए एजेंटों की मदद भी ली जाती है, जो खरीदारों को कॉलोनी की स्थिति के बारे में जानकारी देते हैं।
प्लॉट खरीदने के बाद जब लोग निर्माण शुरू करने के लिए नगर कौंसिल से मंजूरी लेने पहुंचते हैं, तो उन्हें संबंधित जमीन या कॉलोनी की स्थिति के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में खरीदारों की पूंजी फंसने के साथ-साथ उन्हें सड़क, पानी और अन्य सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ सकता है।
प्लॉटों की रजिस्ट्रियों और जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों में नगर कौंसिल तथा राजस्व विभाग की प्रक्रिया की भी जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
विजिलेंस जांच से सामने आए सच्चाई : कुलविंदर संघा
विकास मंच गढ़शंकर के प्रधान कुलविंदर संघा ने कहा कि शहर में कुछ कॉलोनाइजर लोगों को गुमराह करके प्लॉट बेच देते हैं। बाद में खरीदारों को नगर कौंसिल से निर्माण की मंजूरी लेने में दिक्कत आती है और कई बार सड़क तथा पानी के कनेक्शन जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं।
उन्होंने मांग की कि शहर में लंबे समय से बिना मंजूरी या स्वीकृत शर्तों के विपरीत किए गए निर्माणों और जरूरी मंजूरियों के बिना प्लॉटों की रजिस्ट्रियों से संबंधित मामलों की विजिलेंस जांच करवाई जाए। उनके अनुसार, जांच में यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कहीं संबंधित विभागों के अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण सरकारी राजस्व को नुकसान तो नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
बिना मंजूरी प्लॉट बेचने पर कार्रवाई होती है : ईओ
नगर कौंसिल गढ़शंकर के कार्यकारी अधिकारी मदन सिंह ने कहा कि यदि कॉलोनी की मंजूरी के लिए कोई फाइल आती है और संबंधित व्यक्ति बिना मंजूरी के प्लॉट बेचता है, तो ऐसी कॉलोनी को अवैध माना जाता है और नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर प्लॉट की रजिस्ट्री का मामला राजस्व विभाग से संबंधित है। नगर कौंसिल संबंधित मामले में एनओसी जारी नहीं करती, बल्कि नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देती है। अवैध निर्माण या मंजूरी की शर्तों के विपरीत निर्माण किए जाने पर नोटिस जारी किया जाता है। यदि संबंधित व्यक्ति का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो आगे की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने दावा किया कि नगर कौंसिल के संज्ञान में आने वाले मामलों में कार्रवाई की जाती है।
जरूरी दस्तावेजों के आधार पर होती है रजिस्ट्री : तहसीलदार
गढ़शंकर के तहसीलदार लवदीप सिंह ने कहा कि नगर कौंसिल द्वारा कुछ अवैध कॉलोनियों के संबंध में लिखित जानकारी भेजी गई है। ऐसी कॉलोनियों में रजिस्ट्रियां नहीं की जातीं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति व्यक्तिगत तौर पर रजिस्ट्री करवाने आता है, तो नगर कौंसिल के अधिकारियों द्वारा जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाए जाने पर ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। उनके अनुसार, बिना एनओसी के कोई रजिस्ट्री नहीं की जाती।
