गुल्लरवाला में श्रीमद्भागवत कथा सातवां दिन : कथावाचक ऋषि गौतम द्वारा भगवान की दामोदर लीला, श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को ऊँगली पर धारण करना प्रसंग सुनाए।

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राधा कृष्ण महाराज की झांकी निकाली गई, डिप्टी कमिश्नर जीएसटी,कस्टम नारकोटिक्स विशाल चौधरी मौजूद रहे।

बद्दी, 15 जून (तारा) : बद्दी उपमण्डल के गुल्लरवाला के प्रसिद्ध दुर्गा माता मंदिर परिसर में पंचायत के समस्त ग्रामवासियों द्वारा साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के सातवें दिन रविवार को क्षेत्र के प्रसिद्ध कथावाचक ऋषि गौतम द्वारा किये जा रहे प्रवचनों की वर्षा से वातवारण भक्तिमय बना हुआ है। कथा में हर रोज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। जिसमें महिलाओं की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कथावाचक ने माता यशोदा द्वारा भगवान को उखल से बांधना, भगवान की दामोदर लीला, नलकूबर मणिग्रीव का उद्धार,बृजवासियों का गोकुल छोड़ वृंदावन जाना, बकासुर अघासुर का वध, ब्रह्मा जी का मान मर्दन व 7 दिन 7 रात्रि श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठिका उंगली पर धारण कर इंद्र के प्रकोप से रक्षा करना आदि अनेक प्रसंग सुनाए।

कथावाचक ने बताया कि एक एक दिन यशोदा मैया घर में दही मथ रही थीं तभी कृष्ण वहाँ आ गए। माँ के प्रेम से वे उन्हें अपनी गोद में उठाने लगीं, लेकिन उसी समय चूल्हे पर रखा दूध उफनने लगा। मैया कृष्ण को आधा पिलाकर दूध संभालने चली गईं। इससे क्रोधित होकर कृष्ण ने मथानी का डंडा तोड़ दिया और माटी का मटका फोड़ दिया। जब यशोदा जी छड़ी लेकर उन्हें डराने के लिए आईं, तो वे डर कर भागने लगे। अंत में, मैया यशोदा ने उन्हें पकड़ लिया और रस्सी से ऊखल से बाँधना चाहा। उन्होंने घर में मौजूद सारी रस्सियाँ जोड़ दीं, लेकिन हर बार रस्सी हमेशा दो अंगुल छोटी पड़ जाती थी। इससे यह प्रमाणित हुआ कि ईश्वर को केवल भौतिक प्रयासों से नहीं, बल्कि केवल निस्वार्थ प्रेम और भक्ति से ही बाँधा जा सकता है। माता को थककर पसीना बहाते और हैरान होते देख, भगवान कृष्ण ने स्वयं उस प्रेमभाव के आगे समर्पण कर दिया और बंधने की अनुमति दी। इसी घटना के बाद से उन्हें ‘दामोदर’ कहा गया।

इसके बाद कथावाचक ने
नलकुबेर और मणिग्रीव का उद्धार हिंदू पौराणिक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि बाल-कृष्ण द्वारा शरारती स्वरूप में गोकुल में खड़े दो अर्जुन वृक्षों जो वास्तव में कुबेर के शापित पुत्र थे के बीच से गुजरकर उन्हें अपने असली रूप में लाया गया स्वर्ग के देवता कुबेर के पुत्र—नलकुबेर और मणिग्रीव बहुत अहंकारी हो गए थे। क्रोधित होकर नारदजी ने उन्हें गोकुल में सौ वर्षों तक अर्जुन के वृक्ष बने रहने का शाप दे दिया। एक बार माता यशोदा ने उनकी नटखट हरकतों से तंग आकर उन्हें एक भारी लकड़ी के उखल से बांध दिया। कृष्ण उसी उखल को घसीटते हुए आंगन में खड़े उन दो विशाल अर्जुन वृक्षों के बीच से गुजरे।उखल उन वृक्षों के बीच फंस गया। जैसे ही कृष्ण ने उसे खींचने के लिए एक जोर का झटका दिया, दोनों वृक्ष जड़ से उखड़कर गिर गए। उन पेड़ों के गिरते ही उनमें से दिव्य प्रकाश निकला और वे अपने मूल स्वरूप नलकुबेर और मणिग्रीव में वापस आ गए। शाप से मुक्त होकर दोनों भाइयों ने बाल-कृष्ण की स्तुति की और उनकी शरण में रहने का वरदान मांगा। भगवान ने उन्हें क्षमा कर दिया। आयोजकों ने बताया कि सोमवार को दोपहर बाद हवन पूर्णाहुति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर जीएसटी,कस्टम एवम नारकोटिक्स विभाग के डिप्टी कमिश्नर विशाल चौधरी (आईआरएस), गुल्लरवाला पंचायत के उप प्रधान ज्ञान चंद, पूर्व उप प्रधान पम्मी राम, निर्मल गोला पंच,डॉ भाग सिंह चौधरी, प्रकाश, रोशन लाल चौधरी, डॉ भाग सिंह चौधरी, मघर सिंह, सुरिंदर सिंह, बहादुर सिंह, डॉ राम आसरा,बजिन्दर सिंह चौधरी, पंच सोमा देवी, सोचा देवी, बगो देवी, मनजीत कौर, गुरमीत कौर आदि दर्जनों गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे।
भागवत कथा के पश्चात हर रोज भंडारे का आयोजन होता है। रविवार को कृष्ण कुमार व गुरमेल सिंह द्वारा भंडारे की सेवा दी गई।

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