चुवाड़ी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ABHA ID निर्माण का प्रशिक्षण : पोषण ट्रैकर के जरिए लाभार्थियों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड होगा डिजिटल

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संतुलित आहार और पहले 1000 दिन पर विशेष जोर

एएम नाथ। चुवाड़ी : चुवाड़ी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता जिला कार्यक्रम अधिकारी (अतिरिक्त कार्यभार) राजेश राय ने की। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पोषण ट्रैकर ऐप में पंजीकृत सभी लाभार्थियों की ABHA (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) आईडी बनाने की प्रक्रिया और उसके महत्व की जानकारी देना था।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि ABHA आईडी एक 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या होती है, जिसके माध्यम से लाभार्थियों विशेषकर गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े सभी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे टीकाकरण, उपचार और परामर्श से संबंधित जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहती है, जिससे समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं।
राजेश राय ने कहा कि पोषण ट्रैकर में ABHA आईडी के माध्यम से लाभार्थियों का संपूर्ण चिकित्सा इतिहास डिजिटल रूप में संचित किया जा सकता है, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। उन्होंने संतुलित आहार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए जंक फूड से दूरी बनाना आवश्यक है, क्योंकि इससे भूख कम लगती है और शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
जिला समन्वयक पोषण विकास शर्मा ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान एक पोषण मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी लगाई गई। इसके माध्यम से लोगों को पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही, जीवन के पहले 1000 दिनों गर्भधारण से लेकर बच्चे के दो वर्ष तक को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इस अवधि में मां और बच्चे के लिए पौष्टिक भोजन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
बाल विकास परियोजना अधिकारी (अतिरिक्त कार्यभार) धर्मवीर सिंह ने बताया कि 0-6 वर्ष की आयु में बच्चों का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है, इसलिए इस दौरान सही पोषण और देखभाल बेहद जरूरी है। वहीं, खंड समन्वयक पोषण अभियान विकास शर्मा ने अभिभावकों से आंगनबाड़ी केंद्रों में 3-6 वर्ष के बच्चों का नामांकन करवाने की अपील की।
कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि समुदाय के लोग आंगनबाड़ी केंद्रों में पुराने या नए खिलौनों का दान करें, ताकि बच्चों की सीखने और खेलने की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। साथ ही अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने और उन्हें बाहरी खेलों के लिए प्रेरित करने की सलाह दी गई। प्रशिक्षण शिविर में 60 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर किरण बैरी और स्थानीय महिलाओं ने भाग लिया।

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