एक डोनर बचा सकता है आठ जिंदगियां”, डॉ. पुंडीर ने अंगदान के लिए बढ़ाया कदम
समाजसेवा की अनूठी मिसाल, शिक्षक डॉ. मामराज पुंडीर ने किया अंगदान का संकल्प
एएम नाथ। शिमला : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री, पूर्व विशेष कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता और पेशे से शिक्षक डॉ. मामराज पुंडीर ने समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम उठाते हुए अपने शरीर तथा सभी अंगों को मृत्यु उपरांत दान करने का निर्णय लिया है। उनके इस फैसले की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है और इसे सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
डॉ. पुंडीर ने अपने संदेश में प्रदेशवासियों से भी अंगदान के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अंगदान एक ऐसा महादान है, जिससे हम किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति के अंगदान से आठ लोगों की जान बचाई जा सकती है, इसलिए यह हर व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी बनती है कि वह इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए।
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में कई लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और उन्हें जीवन बचाने के लिए अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, लेकिन अंगों की कमी के कारण कई मरीज समय पर उपचार नहीं प्राप्त कर पाते। ऐसे में यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान का संकल्प लें, तो अनेक जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
डॉ. पुंडीर ने अंगदान की प्रक्रिया को भी सरल बताते हुए कहा कि इच्छुक व्यक्ति आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने www.sottohimachal.in वेबसाइट का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां जाकर शपथ पत्र भरकर कोई भी व्यक्ति अंगदान के लिए अपनी सहमति दे सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अंगदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समाज के जागरूक लोग आगे आएंगे, तो यह अभियान एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
डॉ. मामराज पुंडीर का यह निर्णय न केवल मानवता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक दिशा में प्रेरित करता है।
