गढ़शंकर। दिल्ली में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन कर देश का युवा आज अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर है, जो केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।यह शब्द सोशल वेलफेयर सोसाइटी गढ़शंकर के अध्यक्ष हरवेल सिंह सैनी ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या छात्रों की जायज़ मांगों को सुनने के बजाय उनकी आवाज़ को दबाना ही सरकार का समाधान है? क्या लोकतंत्र में शांतिपूर्वक अपनी बात रखना अब अपराध बन गया है? यदि युवा ही अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो देश के भविष्य की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
उन्होंने कहा कि जहाँ विपक्ष के नेता छात्रों के बीच पहुँचकर उनकी मांगें सुन रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार को भी टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए, न कि सख्ती से। उन्होंने सैनी ने कहा कि लोकतंत्र की मज़बूती इसी बात में है कि हर नागरिक, विशेषकर युवा, अपनी आवाज़ बेखौफ़ होकर उठा सके। देश के युवाओं की आवाज़ को सुनना और उनकी चिंताओं का समाधान करना हर सरकार की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि छात्रों की जायज़ मांगों को गंभीरता से सुना जाए और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जाए।
