इसरो, बैंक ऑफ बड़ौदा और विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव; पारदर्शी, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के लिए डिजिटल नवाचारों पर जोर
एएम नाथ। धर्मशाला, 17 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में ई-गवर्नेंस सुधारों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शनिवार को संपन्न हो गया। सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल नवाचार, डेटा एनालिटिक्स और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए देशभर में अपनाई जा रही सफल कार्यप्रणालियों पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें वरिष्ठ प्रशासकों, नीति-निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने डिजिटल माध्यमों से शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, सुरक्षित और प्रभावी बनाने के उपाय साझा किए।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण, डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा, उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सुधारों के अनुभवों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने सफल पहलों को दूसरे क्षेत्रों में लागू करने और नागरिकों तक सरकारी सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल तकनीक पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
ई-गवर्नेंस की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, अनुकरण और डेटा एनालिटिक्स विषय पर आयोजित सत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के वैज्ञानिक रोहित त्यागी ने जोखिम संबंधी खुफिया जानकारी के वितरण के लिए सुरक्षा उत्पादों और डीएनएस फिल्टरिंग सेवाओं के बारे में जानकारी दी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक एवं समूह मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार ने डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने के लिए एकीकृत साइबर सुरक्षा ढांचे के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं, बेंगलुरु स्थित आईसीएआर-निवेदी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के.पी. सुरेश ने राष्ट्रीय पशु रोग संदर्भ विशेषज्ञ प्रणाली पर प्रस्तुति दी।
रक्षा मंत्रालय के विभागाध्यक्ष (सीएससी) कैप्टन रितेश वाही ने क्वांटम-सुरक्षित वीपीएन तकनीक की उपयोगिता और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इन प्रस्तुतियों में डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा और उभरती तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया गया।
सेब खरीद योजना के डिजिटलीकरण से जुड़े अनुभव साझा किए
हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा ने प्रदेश में सेब खरीद के लिए मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के डिजिटलीकरण से पिछले कुछ वर्षों में हुई प्रगति की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में डिजिटल प्रक्रियाओं के इस्तेमाल से जुड़ा अनुभव ई-गवर्नेंस की कार्यप्रणालियों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस सत्र का संचालन डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस के निदेशक तथा मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक अभिषेक वर्मा ने किया।
पुणे से लातेहार तक की सफल पहलें प्रस्तुत
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों के अंतर्गत राज्य, जिला और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों से संबंधित सत्र में विभिन्न क्षेत्रों की नवाचारपूर्ण पहलों को प्रस्तुत किया गया।
पुणे नगर निगम के सिस्टम मैनेजर राहुल जगताप ने पुणे-360 पहल के बारे में जानकारी दी। झारखंड के लातेहार के उपायुक्त संदीप कुमार ने जिला प्रशासन की ओर से संपूर्ण शिक्षा कवच के सफल क्रियान्वयन का विवरण साझा किया। रायपुर के मुख्य आयकर आयुक्त संजीव ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के लाभों और संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
इस सत्र का संचालन पर्यटन सचिव एवं कांगड़ा के मंडलायुक्त संदीप कुमार ने किया। सत्र में प्रस्तुत उदाहरणों के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया कि डिजिटल समाधान स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्रशासनिक कार्यों और सार्वजनिक सेवाओं को किस तरह अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
केंद्र सरकार के अधिकारियों ने आयोजन की सराहना की
भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) की निदेशक डॉ. तुषाबा शिंदे और विभाग के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव ने ई-गवर्नेंस सुधारों से जुड़े अपने विचार साझा किए। उन्होंने धर्मशाला में राष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की।
समापन सत्र में धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रशासनिक सुधार सचिव ए. शैनामोल ने कहा कि सम्मेलन ने विभिन्न राज्यों में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में किए गए कार्यों, उपलब्धियों और अनुभवों से सीखने के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है।
उन्होंने सफल पहलों को अन्य क्षेत्रों में अपनाने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को लागू करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इस तरह के प्रयास शासन व्यवस्था के सामने उभर रही चुनौतियों का समाधान खोजने और डिजिटल रूपांतरण की नई संभावनाओं को तलाशने में सहायक हो सकते हैं।
नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने पर रहा जोर
दो दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक कुशल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के साथ सरकारी सेवाओं को नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाना रहा।
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल तकनीक का प्रभावी उपयोग केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे सेवाओं की गुणवत्ता, जवाबदेही और आम नागरिकों की सुविधा में भी सुधार होना चाहिए।
