नैनवां के जंगल में से हजारों खैर व अन्य पेड़ वन माफिया ने काट कर जंगल को कर दिया तवाह : वन विभाग के अधिकारियों का हर बार की तरह रटा रटाया जबाव पता करेगें और करवाई करेंगे

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अजायब सिंह बोपाराय । गढ़शकर ।  गढ़शंकर के बीत ईलाके के गांव नैनवां के जंगल में वन माफियां ने हजारों खैर व अन्य पेड़ो  को काट कर जंगल को तवाही के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया और दफा चार व पांच की भी धज्जिया उड़ाई जा रही है। बिना मिलीभुगत के इतने बड़े सत्तर पर वन माफिया दुारा नहीं काटा जा सकता।  उधर वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का हर तरह की तरह रटा रटाया जवाब है कि पता करते है,अगर ऐसा है तो बनती कार्रवाई कर दी जाएगी।
गांव नैनवां में करीव एक हजार एकड़ में फैले जंगल में घने पेड़ हुया करते थे और जंगल का अधिकाश क्षेत वन विभाग की दफा चार और पांच में आता है।  लेकिन वन माफिया दुारा गत कई महीनों से जंगल में अवैध कटान लगातार की जा रही है। पिछले तीन से चार महीने में ही चार हजार से अधिक पेड़ काट डाले है। जिसके चलते अव जंगल में पेड़ कहीं कहीं ही दिखाई देते है।
वन माफिया दुारा अवैध तरीके से काटे गए हजारों पेड़ों में अधिकांश पेड़ खैर के है। वन माफिया ने यहां वेशकीमती खैर के पेड़ों को काटने के ईलावा शीशम, कीकर, नीम, शूबबूल आदि पेड़ों को भी नहीं छोड़ा । जिससे गांव नैनवां के जंगल में झाडिय़ां ही चारों और दिखाई दे रही है। पेड़ कहीं कहीं ही दिखाई देता है, वह भी जो अभी छोटा पेड़ या पहाड़ी पर है। यहां माफिया की पहुंच से दूर था। इस तरह जंग पूरी तरह तवाह कर दिया गया। इसके ईलावा वन माफिया काटे पेड़ो को उठाने के लिए गाडिय़ों को उपयोग करते है। जबकि दफा चार व पांच में ना तो कोई रास्ता बना सकता और ना ही गाडिय़ां ले जा सकता।   लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों ने कोई कारवाई नहीं की है
वन गार्ड जसप्रीत सिंह ने संपर्क करने पर कहा कि मुझे तो पता नहीं लेकिन दफा चार व पाचं के जंगल के क्षेत्र में तो इस महीने खैर के पेड़ को काटने का ना तो प्रमिट मिलता और ना महीने तो काटे जा सकते है।
जड़ से उखाड़ डाले है खैर के पेड़ : खैर के पेड़ों को वन माफिया सबसे ज्यादा निशाना बनाता : खैर की लकड़ की मार्केट में काफी ज्यादा कीमत ज्यादा होने के कारण वन माफिया सबसे खैर के पेड़ों की ही अवैध रूप से कटाई कर रहा है। गांव नैनवां के जंगल में तो खैर के पेड़ों को काटने के बाद काफी ज्यादा पेड़ों को तो सबूत मिटाने के लिए जड़ से ही उखाड़ लिया गया।

विभाग के अधिकारी मामला दर्ज करवाने की जगह जुर्माने करने तक सीमित : अधिकांश तौर विभाग के अधिकारी अवैध तोर पर पेड़ काटने के मामले को दबाने के लिए मामला दर्ज करवाने की जगह कुछ पेड़ों को काटा हुया दिखाकर उनकी डैमेज रिर्पोट काट कर मामूली जुर्माना वसूल कर खानापूर्ति भी कर देते है और वन माफिया को भी बचा जाते है।
डीएफओ हरभजन सिंह : जंगल में अवैध कटाई का पता नहीं है पता कर अगर अवैध कटाई हुई मिली तो बनती कार्रवाई कर दी जाएगी।
फोटो : नैनवां के जंगल में काटे गए पेड़ों की तस्वीरें।

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