भाजपा विधायकों को प्रस्तुति के माध्यम से राज्य की वित्तीय स्थिति को बेहतर तरीके से समझना चाहिए थाः मुख्यमंत्री सुक्खू

by
राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करना सरकार का नहीं, बल्कि राज्य की जनता के अधिकारों का मुद्दा हैः मुख्यमंत्री
एएम नाथ। शिमला : वित्त विभाग द्वारा आज यहां राज्य की वित्तीय स्थिति तथा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति के प्रभावों पर एक प्रस्तुति मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, मंत्रीगण, विधायकगण, प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रदेश मीडिया सहित अन्य गणमान्य लोगों के समक्ष दी गई। प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का राज्य की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आरडीजी की समाप्ति किसी सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता के अधिकारों के हनन से जुड़ा विषय है। हम इस मामले को लेकर भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हैं। यदि एक बार आरडीजी का प्रावधान समाप्त किया जाता है, तो राज्य की जनता के अधिकारों को सुरक्षित रख पाना कठिन हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस प्रस्तुति में शामिल होने के लिए भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश वे नहीं आए। उन्होंने कहा कि 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है क्योंकि राज्य के बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता है, देश में दूसरा सबसे अधिक आरडीजी का हिस्सा हिमाचल को मिलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद कर संग्रह की  दर घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है, जबकि पूर्व में यह 13 से 14 प्रतिशत थी। हिमाचल प्रदेश एक उत्पादक राज्य है जबकि जीएसटी उपभोग आधारित कर है, इसलिए इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। राज्य की जनसंख्या 75 लाख है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कर लगाने की क्षमता भी राज्य से छीन ली गई है।No photo description available.
उन्होंने कहा, ‘हम सभी को मिलकर प्रदेश के हितों के लिए लड़ाई लड़नी होगी। जिन बिजली परियोजनाओं ने पूरा ऋण चुका दिया है, केंद्र सरकार को ऐसी परियोजनाओं पर कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित करनी चाहिए इसके अलावा जिन परियोजनाओं के संचालन के 40 वर्ष पूरे हो चुके हैं, उन्हें राज्य को वापस लौटाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 से अब तक भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के 4500 करोड़ रुपये की बकाया राशि राज्य को नहीं मिली है, जबकि इस संबंध में सर्वाेच्च न्यायालय का फैसला भी आ चुका है। उन्होंने कहा कि शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और इसे पंजाब सरकार से वापस लेने के लिए राज्य कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस दिशा में पहले दिन से ही संकल्पित प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार संसाधन जुटाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है क्योंकि राज्य के पास राजस्व के मुख्य स्रोत केवल नदियां, वन सम्पदा और पर्यटन हैं।
उन्होंने कहा, ‘मैं प्रदेशवासियों को आश्वासन देता हूं कि लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा, राज्य के संसाधनों में वृद्धि करने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।’
श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने आम आदमी पर बोझ डाले बिना संसाधनों के सृजन की दिशा में नीतियां लागू की है। राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष वन क्षेत्र का मामला उठाया, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया है। इसके अतिरिक्त, भूस्खलन से होने वाली आपदाओं के लिए भी धन आवंटन पर सहमति बनी है जबकि इससे पूर्व केवल सूखा और चक्रवात की स्थिति को ही आपदा की श्रेणी में शामिल किया जाता था।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर मंत्रिमंडल के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी और इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए केवल सुझाव प्रस्तुत किए हैं और इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल द्वारा लिया जाएगा।
प्रस्तुति के दौरान राज्य के लिए आरडीजी के महत्व को रेखांकित किया गया। वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कई बार वित्त आयोग के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत आरडीजी का प्रावधान किया गया है और यह 15वें वित्त आयोग तक राज्य को मिलता रहा है।
उन्होंने बताया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार वित्त आयोग राज्यों की राजस्व और व्यय का आकलन करता है। वर्ष 2021 से 2026 के लिए राज्य की आय 90,760 करोड़ रुपये और व्यय 1,70,930 करोड़ रुपये आंका गया था। 80,170 करोड़ रुपये के घाटे की पूर्ति 35,064 करोड़ रुपये टैक्स डिवॉल्यूशन, 37,199 करोड़ रुपये आरडीजी और 9,714 करोड़ रुपये अन्य अनुदानों से की गई। 16वें वित्त आयोग ने किसी भी राज्य की आय और व्यय का अलग से आकलन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य की अपनी आय लगभग 18,000 करोड़ रुपये है, जबकि प्रतिबद्ध व्यय लगभग 48,000 करोड़ रुपये है, जिसमें वेतन, पेंशन, ऋण का ब्याज और मूलधन, सब्सिडी, सामाजिक सुरक्षा पेंशन इत्यादि शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में राज्य को लगभग 13,950 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये के ऋण की सीमा को जोड़कर उपलब्ध संसाधनों से लगभग 42,000 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। आरडीजी समाप्त होने के कारण बजटीय प्रावधानों को पूरा करने में गंभीर संसाधन संकट उत्पन्न हो गया है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास कार्यों, लंबित देनदारियों और राज्य योजनाओं को छोड़कर लगभग 6,000 करोड़ रुपये का संसाधन अंतर है। राजस्व बढ़ाने और व्यय घटाने के सुझाव तुरंत या कम अवधि में लागू नहीं किए जा सकते। इन सुधारों के बाद भी संसाधन अंतर बना रहेगा और आरडीजी इस अंतर को पाटने में सहायक रही है।
इसी कारण हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों को विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया था। हिमाचल प्रदेश का गठन जनता की आकांक्षाओं के आधार पर हुआ था, न कि एक वित्तीय रूप से सक्षम इकाई के रूप में। इन सिफारिशों का प्रभाव केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली सरकारों पर भी पड़ेगा और यह राज्य की जनता के साथ गंभीर अन्याय होगा।
Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

स्वयं सहायता समूहों व कृषि उत्पादक संघों को भी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों से जोड़ा जाए : DC मुकेश रेपसवाल

चंबा में जिला सहकारिता विकास समिति की 5 वीं बैठक आयोजित उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने की बैठक की अध्यक्षता एएम नाथ। चम्बा : जिला मुख्यालय चंबा में जिला सहकारिता विकास समिति की बैठक आयोजित...
article-image
समाचार , हिमाचल प्रदेश

कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 460 करोड़ रुपये वितरित: 1899 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि शीघ्र की जाएगी वितरित

 एएम नाथ। शिमला : पर्यटन विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं की आज यहां समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के...
हिमाचल प्रदेश

भारत  सरकार ने हिम गौरव आई टी आई सन्तोषगढ में  खाली वची  सीटें भरने की दी अनुमति

ऊना : हिमाचल व भारत सरकार ने हिम गौरव आई टी आई सन्तोषगढ में कोविड 19 के मध्यनजर रखते हुए सभी ट्रेडों में खाली सीटों में दाखिला करने के लिए तिथि आगे वढा 16...
article-image
हिमाचल प्रदेश

प्रदेश सरकार ने किसानों से खरीदी 2123 क्विंटल गेहूं, 1.31 करोड़ रुपये किसानों के खातों में हस्तातंरित

एएम नाथ। शिमला : प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों के जीवन स्तर को और बेहतर बनाने व उनकी आर्थिकी को मजबूत करने के लिए अपने कार्यकाल के दौरान अनेक महत्वकांक्षी योजनाएं आरम्भ की हैं। प्रदेश...
Translate »
error: Content is protected !!