मनीष तिवारी-थरूर ने फिर पार्टी लाइन से हटकर दिया बयान : ईरान युद्ध पर भारत सरकार के रुख पर बंटी कांग्रेस?

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर कांग्रेस में गुटबाजी सामने आई है. जहां कांग्रेस भारत में केंद्र सरकार के रुख पर हमलावर है तो वहीं पार्टी के दो नेताओं ने सरकार के रुख को सही बताया है।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि यह युद्ध भारत का नहीं है. मिडिल ईस्ट में भारत के 4.8 मिलियन लोग रहते हैं. सरकार का रुख इस युद्ध को लेकर सही है.

इसके अलावा तिवारी ने कहा कि हमारा एक बहुत बड़ा प्रवासी वर्ग इन इलाकों में रहता है. यहां करीबन 48 मिलियन लोग रहते हैं. इसके अलावा हमारी ऊर्जा सुरक्षा की अनिवार्यताएं हैं. यह कच्चे तेल और नेचुरल गैस तक सीमित नहीं है. हम इन इलाकों से आने वाला उर्वरक पर भी निर्भर हैं. अगर हम सावधानी बरत रहे हैं, तो मुझे लगता है कि शायद हम सही काम कर रहे हैं.

कांग्रेस ने सरकार के रुख की आलोचना की :  कांग्रेस ने भारत सरकार के ईरान को लेकर रुख की कड़ी आलोचना की थी. कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर श्रद्धांजलि नहीं दी. इस पर राहुल गांधी ने कहा था कि किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौत पर पीएम की चुप्पी मतलब हत्या का समर्थन है. हालांकि सरकार की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका पर साइन किए. यह भारत की पहली ऑफिशियल प्रतिक्रिया थी.

इसके अलावा राहुल गांधी ने एक पोस्ट में कहा था कि लगभग एक करोड़ भारतीय सहित कोरोड़ों लोग अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं. हालांकि, सुरक्षा संबंधी चिंताएं वास्तविक हैं. संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले संकट को और ही बिगाड़ेंगे. ईरान पर एकतरफा हमलों के साथ ही ईरान की तरफसे मध्यपूर्वी देशों पर किए हमलों की निंदा की जानी चाहिए.

थरूर ने किया सरकार का समर्थन :  शशि थरूर ने भी सरकार के रुख का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि भारत की चुप्पी को कायरता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि चुप्पी का मतलब समर्थन नहीं होता. इसके अलावा शशि थरूर ने जवाहरलाल नेहरू का हवाला देते हुए कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री की गुटनिरपेक्षता की नीति को आज की तेजी से बहुध्रुवीय होती दुनिया में फिर से परिभाषित किया गया है. भारत कई पक्षों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है. भले ही वे आपस में युद्धरत हों. इसके अलावा थरूर ने लिखा कि मध्यपूर्व में भारत के बहुत अधिक हित दांव पर लगे हैं. इसलिए वह खुद युद्ध की खुले तौर पर निंदा करके पूरी तरह से नैतिक रुख नहीं अपना सकता

भारत की चुप्पी युद्ध का समर्थन नहीं  :  इसके अलावा उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध इंटरनेशनल कानून के तहत अनुचित है. भारत की चुप्पी उस युद्ध का समर्थन नहीं है. यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि हमारे राष्ट्रीय हित के लिए समझदारी की आवश्यकता है. न कि दिखावे की. यदि में किसी भी भारतीय सरकार को सलाह दे रहा होता तो मैं भी संयम बरतने की ही सलाह देता. संयम ही शक्ति है. वह शक्ति जो सिद्धांतो और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाती है. जो हमारे हितों की रक्षा करते हुए हमारे मूल्यों का सम्मान करती है. जो खतरनाक दुनिया में बहादुरी के बजाय बुद्धिमानी से आगे बढ़ती है।

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