महाविद्यालयों में अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम एवं नए कौशल आधारित स्नातक पाठ्यक्रम शुरू होंगेः शिक्षा मंत्री

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एएम नाथ। शिमला : शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं एवं सुधारों की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान की है तथा अनेक महत्त्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्नातक डिग्री पूर्ण कर चुके विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम प्रारम्भ करने जा रही है। इस पहल के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न उद्योगों के साथ कार्य करने का अवसर मिलेगा तथा उन्हें स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा। इससे उनके कौशल विकास के साथ-साथ रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महाविद्यालय स्तर पर विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की योजना है, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की भाषा दक्षता प्राप्त होगी और अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
उन्होंने कौशल आधारित स्नातक पाठ्यक्रम (बी.वोक.) की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। इसी को देखते हुए सरकार इस योजना के अंतर्गत चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बजट घोषणा के अनुरूप शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत एसएमसी अध्यापकों, मिड-डे मील कर्मियों, जल वाहकों, कंप्यूटर शिक्षकों तथा बहु-उद्देशीय कर्मियों के मानदेय में 500 रुपये प्रति माह की वृद्धि की गई है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए कक्षा 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। उन्होंने बायोमैट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाने और अनुपालना न होने की स्थिति में वेतन कटौती जैसे कदमों पर भी बल दिया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न श्रेणियों के 1,131 एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां एलडीआर श्रेणी के माध्यम से की गई हैं। इसके अतिरिक्त 714 पीजीटी तथा 102 डीपीई पदों के लिए एलडीआर प्रक्रिया शीघ्र आरम्भ की जाएगी। कंप्यूटर शिक्षकों के मामलों में आवश्यक नियम संशोधन किए जाएंगे।
उन्होंने अधिकारियों को राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजे गए शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा के अनुरूप बागवानी विषय को विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के रूप में आरम्भ किया जा चुका है। उन्होंने विभाग को विशेष रूप से बागवानी प्रधान क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का और विस्तार करने के निर्देश दिए।
श्री ठाकुर ने विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण की समीक्षा करते हुए विभाग को इस प्रक्रिया में तेजी लाने तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र विद्यार्थी अपनी आवश्यकता एवं पसंद के अनुसार उपकरण खरीद सकें। उन्होंने उप-निदेशकों को निर्देश देते हुए कहा कि उपलब्ध करवाई गई राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में शिक्षा मंत्री ने विभाग को उपनिदेशकों की पदोन्नति संबंधी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला अटॉर्नी के पद सृजित करने संबंधी प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष शीघ्र ही प्रस्तुत किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में राज्य के 148 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई संबद्धता प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में और अधिक विद्यालयों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। उन्होंने सभी ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर दिसंबर माह में परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक के दौरान विभाग के अधिकारियों द्वारा पीडीएनए कार्यों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग तथा हिमुडा को 19 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को गैर-कार्यशील केंद्रीय विद्यालयों से संबंधित लंबित औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा कर उन्हें जल्द संचालित करने के निर्देश दिए।
शिक्षा मंत्री ने डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना की भी समीक्षा की। इस योजना अन्तर्गत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज की दर से 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने इस योजना की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ सुनिश्चित हो सके।
शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा तथा शिक्षक समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई)    2.0 में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर छठा स्थान तथा राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त देश में दूसरे सर्वाेच्च ग्रेड वाली प्रचेस्टा-2 श्रेणी में द्वितीय स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा विभाग इसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श स्थापित करेगा।
बैठक में सचिव शिक्षा राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. हरीश कुमार अवस्थी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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