मेरी हैसियत नहीं कि मैं अकाल तख्त को चुनौती दूं …..अकाल तख्त सचिवालय के सामने पेश हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान

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अमृतसर : मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार को श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय सामने पेश हुए। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के मद्देनजर तख्त के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मैंने लिखित में अकाल तख्त साहिब के सामने अपना पक्ष रखा है।

सिख परंपराओं और सिद्धांतों के बारे में कथित टिप्पणियों के संबंध में अकाल तख्त ने उन्हें तलब किया था। इसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अमृतसर स्थित अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष पेश हुए। बता दें कि भगवंत मान बुधवार को ही अमृतसर पहुंच गए थे। अकाल तख्त सचिवालय में पेश होने से पहले उन्होंने गुरुवार को स्वर्ण मंदिर में माथा टेका।

फोरेंसिक लैब में करवा लें जांच- पेश होने के बाद सीएम भगवंत मान ने कहा कि मैंने श्री अकाल तख्त के सामने मेरे खिलाफ मिली सभी शिकायतों के विरुद्ध अपना पक्ष रखा है। मैंने इसके लिए लिखित प्रमाण भी पेश किए हैं। मैंने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि भगवंत मान श्री अकाल तख्त को चुनौती दे रहा हैं। अकाल तख्त को लेकर ऐसा करने का मुझे कोई भी अधिकार नहीं है। सिंह साहब का फैसला मुझे सूचित किया जाएगा। मैं सिंह साहब के निर्णय का सम्मान किया जाएगा। मैंने उन्हें बताया कि वीडियो फर्जी है और इसकी जांच किसी भी फोरेंसिक लैब में कराई जा सकती है। बता दें कि मुख्यमंत्री सुबह 11.30 बजे अकाल तख्त सचिवालय पहुंचे। अकाल तख्त साहिब सिखों का सर्वोच्च धार्मिक आसन है।

मुझमें इतनी हिम्मत और हैसियत नहीं- उन्होंने अपने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, पिछले कई दिनों से कुछ शरारती तत्व सोशल मीडिया पर यह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि मैं श्री अकाल तख़्त साहिब को चुनौती दे रहा हूँ। ना तो मुझमें इतनी हिम्मत है और ना ही इतनी हैसियत। मैं एक विनम्र सिख के रूप में उपस्थित हुआ हूँ और एक सेवादार के रूप में अपना पक्ष रखा है।

मुख्यमंत्री पर लगे थे ये आरोप : अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज ने पिछले सप्ताह उन्हें ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे के दानपेटी) पर कथित तौर पर टिप्पणी करने और ‘सिख गुरुओं’ और शहीद आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में तलब किया था। जत्थेदार ने कहा कि भगवान मान ने जानबूझकर सिख-विरोधी मानसिकता दिखाई है और बार-बार ‘दशमांश’ के सिद्धांत के खिलाफ ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणियाँ कीं। बता दें कि सिख धर्म में दसवां हिस्सा पूजा स्थल को दान करने की प्रथा है।

अकाल तख्त साहिब के सामने क्यों नहीं गए मुख्यमंत्री? कुलदीप सिंह गरगज्ज ने कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री एक ‘पतित’ (बाल मुंडवाने वाला सिख) है और श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं हो सकते, इसलिए उन्हें अपना स्पष्टीकरण देने के लिए अकाल तख्त के सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए तलब किया गया है।

अकाल तख्त साहिब मेरे लिए सर्वोपरि- मुख्यमंत्री

इससे पहले भगवंत मान ने कहा था, “मैं वहां मुख्यमंत्री बनकर नहीं बल्कि एक सच्चा सिख बनकर जाऊंगा। श्री अकाल तख्त साहिब जी का कोई भी आदेश मुझे श्रद्धा के साथ स्वीकार्य है और मैं उसका पालन करूंगा। श्री अकाल तख्त साहिब मेरे लिए सर्वोपरि हैं। उस पवित्र तख्त से मिले किसी भी आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा।

 

 

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