जबलपुर: बीते मंगलवार को जब दिल्ली के खजान बस्ती से छह लोगों का परिवार जबलपुर के लिए निकला था, तो उनके चेहरों पर खुशी थी। वे एक पारिवारिक गृह प्रवेश के कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे।
लेकिन शनिवार की सुबह जब वापसी हुई, तो नजारा दिल दहला देने वाला था। परिवार के तीन सदस्य- 39 साल की मरीना मैसी, उनकी 62 साल की मां मधुर और महज 4 साल का मासूम बेटा तृषान, लकड़ी के ठंडे ताबूतों में लौटे।
जिंदा बचे अपनों का टूटा हौसला : हादसे में मरीना के पति प्रदीप कुमार वर्मा, उनके पिता जूलियस मैसी और 14 साल की बेटी सिया किसी तरह बच तो गए, लेकिन उनकी रूह जख्मी है। अपनी पट्टी बंधी उंगली से ताबूतों की तरफ इशारा करते हुए प्रदीप दहाड़ें मारकर रो पड़े। उन्होंने कहा, ‘मैं उन्हें इस तरह लेकर नहीं गया था, मुझे उन्हें वैन में वापस लाना पड़ा। अब मेरा ख्याल कौन रखेगा? वो मासूम छोटू (तृषान) तो घर आते ही मुझसे लिपट जाता था।’
‘नाविक की लापरवाही ने ली जान’ : हादसे के वक्त नाव पर मौजूद प्रदीप ने नाव चलाने वाले और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदीप के मुताबिक, नाविक को सही ट्रेनिंग नहीं थी और वह बोट ठीक से नहीं चला रहा था। प्रदीप ने बताया, ‘जैसे ही लहरें तेज हुईं और पानी का बहाव बढ़ा, नाविक हमें बीच मझधार में छोड़कर खुद कूद गया। यह साफ तौर पर लापरवाही का मामला है जिसने मेरी दुनिया उजाड़ दी।’
यादों में बसा परिवार : मरीना को उनके जानने वाले एक बेहतरीन डांसर और संगीत प्रेमी के रूप में याद करते हैं। वहीं उनकी मां मधुर बेहद धार्मिक महिला थीं जो दूसरों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहती थीं। सबसे ज्यादा दुख 4 साल के तृषान के लिए है, जिसका अभी हाल ही में स्कूल में एडमिशन हुआ था। पड़ोसियों के मुताबिक, तृषान बहुत होनहार और मिलनसार बच्चा था।
