शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त करने का मुख्यमंत्री का बयान मात्र कागजों पर: शिक्षकों की कमी झेल रहे स्कूलों से बड़ी संख्या में शिक्षक गैर-शैक्षणिक ड्यूटी पर – डीटीएफ नेता

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गढ़शंकर, 5 फरवरी : शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने का दावा करने वाली पंजाब सरकार पहले ही हजारों शिक्षकों को बीएलओ को अगले आदेशों तक जिला होशियारपुर में चुनाव ड्यूटी जैसे गैर-शैक्षणिक कर्तव्यों पर (बूथ लेवल ऑफिसर) की तैनाती की डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) होशियारपुर ने कड़ी निंदा की है।
इस संबंध में डीटीएफ के प्रदेश महासचिव मुकेश कुमार व जिला अध्यक्ष सुखदेव डानसीवाल ने एक बयान जारी कर कहा कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह छूट देने की मुख्यमंत्री की घोषणा झूठी है और ऐसे फैसले से शिक्षा को प्राथमिकता देने के सरकार के दावे पूरी तरह खोखले हैं। इन नेताओं ने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है, कई स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक स्थायी रूप से तैनात नहीं है और कई स्कूलों में एकल शिक्षक हैं। ऐसी स्थिति में जब 15 हजार से अधिक सरकारी शिक्षक पहले से ही बीएलओ की ड्यूटी निभा रहे हैं अब जिले में एसडीएम कार्यालयों द्वारा बड़ी संख्या में अन्य शिक्षकों को इस गैर शैक्षणिक कर्तव्य पर भेजा जा रहा है। इस समय इस बात का ध्यान नहीं रखा जा रहा है कि स्कूलों में दसवीं और बारहवीं की वार्षिक परीक्षाएं 13 फरवरी से और बाकी सभी कक्षाओं की 7 मार्च से शुरू होने वाली हैं। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक शिक्षक का कार्यभार संभाल रहे हैं, उनमें बोर्ड की कक्षाएं भी इन्हीं शिक्षकों द्वारा ली जा रही हैं, इसमें स्कूल क्लर्क की भी शामिल है, उन्हें डाक संबंधी सभी कार्य और वार्षिक परीक्षा केंद्र का प्रबंधन करना होता है। जिससे डाक कार्य का बोझ भी शिक्षकों पर आयेगा। अधिकांश स्कूलों में इन कर्तव्यों में कक्षा चार के कर्मचारी भी शामिल हैं। इस तैनाती के बाद पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को चल रही पठन-पाठन प्रक्रिया में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
डीटीएफ नेता इंद्रसुखदीप ओडरा जिला महासचिव, मंजीत दसूहा, डीएमएफ जिला महासचिव ने मांग की कि आम आदमी पार्टी सरकार ने सत्ता में आने से पहले विधानसभा से लेकर विभिन्न स्थानों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा किए गए वादों को सार्वजनिक घोषणाओं के अनुसार पूरा किया जाना चाहिए। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर केवल शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाना चाहिए ताकि राष्ट्र निर्माता समाज के निर्माण की जिम्मेदारी ठीक से निभा सकें।
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