सहकारिता विभाग का 53 करोड़ रुपये से होगा डिजिटलीकरण : उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

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सहकारिता विभाग के कंप्यूटरीकरण से सुनिश्चित होगी पारदर्शिता और कार्यकुशलताः उप-मुख्यमंत्री
पहले चरण में 870 पीएसीएस का कंप्यूटरीकरण कार्य किया गया है पूर्ण, दूसरे चरण में 919 पीएसीएस का होगा कंप्यूटरीकरण
एएम नाथ। शिमला : उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज यहां कहा है कि प्रदेश सरकार सहकारी समितियों को डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से जोड़ने के लिए तीव्र गति से कार्य कर रही है। सहकारिता क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण के लिए विभाग में डिजिटलीकरण कार्यक्रम लागू किया गया है, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता समितियों से आम लोग जुड़े हुए होते हैं और उनमें उनकी पूंजी का निवेश होता है, इसलिए समितियों के संचालन में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश मे 1,789 प्राथमिक कृषि सेवा सहकारी समितियों (पीएसीएस) के कंप्यूटरीकरण के लिए 53 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। वर्तमान में 22.18 करोड़ रुपये कंप्यूटरीकरण के कार्य के लिए खर्च किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि पहले चरण में 870 पीएसीएस का कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे चरण में 919 पीएसीएस को कंप्यूटरीकरण के लिए चयनित किया गया है।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार की यह पहल केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और आर्थिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम है। इससे अनियमितताओं पर रोक लगेगी तथा समितियों का संचालन पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित होगा।
सहकारिता विभाग ने समितियों की ऑडिट प्रक्रिया को सशक्त करने के लिए 30 मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए हैं, जो ऑडिटरों को प्रशिक्षित करेंगे। सभी सहकारी समितियों का ऑडिट 30 सितंबर, 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार द्वारा 1,153 पीएसीएस को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर 300 से अधिक डिजिटल सेवाएं जैसे टेली-लॉ, टेलीमेडिसिन, पेंशन, प्रमाण पत्र, बैंकिंग सेवाएं आदि उपलब्ध होंगी। इससे ग्रामीणों को गांव में ही अनेक सरकारी सेवाएं सुलभ होगी।
प्रदेश में सहकारी समितियों मंे पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उन्हें राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है। इस डेटाबेस के माध्यम से समितियों की भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईै) आधारित निगरानी संभव होगी, जिससे प्रशासनिक निर्णय और नीति निर्माण में पारदर्शिता बढ़ेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सहकारी समितियों को सक्षम, स्वावलंबी और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए प्रमुखता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल एक संगठन नहीं, यह जनता का विश्वास है। इनके सशक्त और पारदर्शी होने से राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

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