चमनदीप मिल्खी और विजय लंकेश हिरासत में; सीएम के ओएसडी राजबीर घुम्मन सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए
संगरूर। मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन के भवानीगढ़ स्थित आवास पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा में चूक के मामले में भवानीगढ़ थाना प्रभारी (SHO) यशपाल शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। सीबीआई की टीम जब कार्रवाई के लिए पहुंची थी, उस दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं और समर्थकों ने कथित तौर पर सीबीआई अधिकारियों की गाड़ी पर फूल बरसाए और ढोल बजाए। इस दौरान कुछ लोगों के नाचने का वीडियो भी सामने आया था।
मामले में पुलिस ने अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के नेता चमनदीप मिल्खी और शिरोमणि अकाली दल (पुनर) के नेता विजय लंकेश को बुधवार सुबह करीब 8 बजे हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था में चूक को गंभीरता से लेते हुए SHO के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
CBI रेड के विरोध में AAP का प्रदर्शन
सीबीआई की कार्रवाई के विरोध में आम आदमी पार्टी (AAP) ने बुधवार को लुधियाना में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने दुगरी स्थित भाजपा कार्यालय की ओर मार्च किया। इस दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
राजबीर घुम्मन CBI के सामने नहीं हुए पेश
सीबीआई ने रेड के बाद मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों को पूछताछ के लिए समन जारी किए थे। उन्हें बुधवार को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कार्यालय में पेश होना था, लेकिन वह पेश नहीं हुए। जांच एजेंसी उनसे ईडी की ओर से लगाए गए कथित कैश फॉर ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी टेंडरों में दखल से जुड़े आरोपों के संबंध में पूछताछ कर सकती है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने समन को लेकर कहा कि नोटिस का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने जांच को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनकी सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
छह घंटे चली थी सीबीआई की कार्रवाई
मंगलवार शाम करीब 5 बजे सीबीआई ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ कैंप ऑफिस सहित पंजाब में करीब आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। कार्रवाई रात करीब 11 बजे तक चली। इस दौरान टीमों द्वारा लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज सहित डिजिटल सामग्री जब्त किए जाने की बात सामने आई है।
यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, ट्रांसफर-पोस्टिंग और सरकारी कार्यों में कथित हस्तक्षेप के आरोप लगाए थे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI जांच
ईडी की ओर से जुलाई-अगस्त 2026 में पंजाब के डीजीपी को कई पत्र भेजकर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। इनमें ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, सरकारी टेंडर, सीएलयू और अन्य सरकारी मंजूरियों में कथित हस्तक्षेप के आरोपों का उल्लेख किया गया था।
ईडी की जांच में नितिन गोहल, राजबीर सिंह घुम्मन सहित कुछ अन्य लोगों की भूमिका का उल्लेख सामने आया। एजेंसी ने कथित वॉट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का भी हवाला दिया था। जांच के दौरान कुछ ठिकानों से दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिलने तथा नितिन गोहल से करीब 20.98 लाख रुपये नकद बरामद होने का दावा भी किया गया।
मामले का एक पहलू जीएमएडीए की जमीन, सीएलयू, प्रॉपर्टी लेन-देन और रियल एस्टेट से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच से भी जुड़ा बताया गया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को मामले में सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच करने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पंजाब सरकार ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
