स्थानीय निकायों की वित्तीय मजबूती पर जोर, मान बोले- टिकाऊ वित्तीय ढांचा जरूरी

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सातवें पंजाब वित्त आयोग के साथ मुख्यमंत्री ने की बैठक; पंचायतों और नगरपालिकाओं की आय-व्यय व वित्तीय जरूरतों का व्यापक आकलन कर व्यावहारिक सिफारिशें देने की उम्मीद

चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मजबूत वित्तीय ढांचे की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता उपलब्ध कराना जरूरी है।

वित्तीय विकेंद्रीकरण का संवैधानिक माध्यम

सातवें पंजाब वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य वित्त आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं के लिए वित्तीय विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है। आयोग राज्य और स्थानीय निकायों के बीच करों, शुल्क, रोड टैक्स और अन्य प्राप्तियों में हिस्सेदारी को लेकर सिफारिशें करता है।

स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति की होगी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की जांच करना तथा उनकी वित्तीय देनदारियों और स्थिरता को मजबूत करने के लिए आवश्यक ढांचे की सिफारिश करना है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों पर नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने और बुनियादी ढांचे के विकास की जिम्मेदारी बढ़ रही है। ऐसे में संसाधनों के आवंटन के लिए पारदर्शी, न्यायसंगत और टिकाऊ व्यवस्था जरूरी है।

व्यावहारिक सिफारिशों की उम्मीद

मान ने उम्मीद जताई कि आयोग स्थानीय निकायों की आय क्षमता, खर्च की जिम्मेदारियों और वित्तीय जरूरतों का व्यापक मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर उनकी वित्तीय क्षमता बढ़ाने और कामकाज को प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक तथा भविष्य को ध्यान में रखकर सिफारिशें की जाएंगी।

राजस्व हिस्सेदारी तय करने में आयोग की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्क, टोल और फीस से होने वाली कुल प्राप्तियों में राज्य तथा पंचायतों-नगरपालिकाओं की हिस्सेदारी को लेकर सिफारिश कर सकता है। इसके अलावा विभिन्न स्तरों के स्थानीय निकायों के बीच प्राप्तियों के वितरण का आधार भी तय करने में आयोग की भूमिका है।

गैर-उत्पादक खर्च घटाने पर भी जोर

उन्होंने कहा कि आयोग गैर-उत्पादक राजस्व व्यय को कम करने और पूंजीगत संसाधनों के कुशल उपयोग के उपाय सुझा सकता है। प्रशासनिक क्षमता तथा तकनीकी सहायता में सुधार के लिए भी आयोग सिफारिशें करेगा।

के. शिव प्रसाद की अध्यक्षता में आयोग

राज्य सरकार ने ‘पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए पंजाब वित्त आयोग अधिनियम, 1994’ की धारा 3(1) के तहत सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन किया है। पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के. शिव प्रसाद को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। शौकत राय विशेषज्ञ सदस्य हैं, जबकि ग्रामीण विकास एवं पंचायतें तथा स्थानीय निकाय विभागों के प्रशासनिक सचिव पदेन सदस्य हैं। विशेष सचिव, वित्त विभाग को पदेन सदस्य सचिव बनाया गया है।

30 सितंबर 2027 तक देनी होगी रिपोर्ट

आयोग का पांच वर्ष का कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और उसे 30 सितंबर 2027 तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। मुख्यमंत्री ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार आयोग को आवश्यक सहयोग और सहायता उपलब्ध करवाएगी।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, स्थानीय निकाय विभाग के सचिव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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