हिमाचल विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश : अयोग्य विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन

by

एएम नाथ :  शिमला, 01 अप्रैल । हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विधायकों की पेंशन से जुड़ा एक अहम संशोधन विधेयक बुधवार को पेश किया गया। इसके तहत अब दलबदल के कारण अयोग्य ठहराए जाने वाले विधायकों को पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा।

सरकार ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में पुनःस्थापित करते हुए स्पष्ट किया है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और दलबदल को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विधेयक में प्रस्ताव है कि यदि कोई विधायक 14वीं विधानसभा या उसके बाद सदस्य के रूप में चुने जाने के बावजूद संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य घोषित होता है तो उसे पेंशन का अधिकार नहीं मिलेगा। अब तक राज्य के मौजूदा कानून में इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं था। सरकार का कहना है कि इस संशोधन से जनादेश की रक्षा होगी और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।

इस संशोधन का असर मौजूदा विधानसभा कार्यकाल से जुड़े कुछ पूर्व विधायकों पर भी पड़ेगा। दरअसल, मौजूदा विधानसभा में दो वर्ष पूर्व दल-बदल के चलते कांग्रेस के छह पूर्व विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया था। इन्होंने वर्ष 2024 में राज्यसभा की एक सीट पर हुए चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी। इसकी बदौलत बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी राज्यसभा चुनाव हार गए थे, जबकि भाजपा के हर्ष महाजन विजयी हुए थे। उस समय कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग के बाद भाजपा का दामन थाम लिया था। इनमें सुधीर शर्मा, इंद्रदत्त लखनपाल, रवि ठाकुर, राजेंद्र राणा, चैतन्य शर्मा और देवेंद्र भुट्टो शामिल थे। इनमें पहली बार चुनकर आए चैतन्य शर्मा और देवेंद्र भुट्टो को अब पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह राज्य के विधानसभा इतिहास में पहली बार होगा जब किसी विधायक को इस आधार पर पेंशन से वंचित होना पड़ेगा।

हालांकि, बाकी चार पूर्व विधायकों को उनके पहले के कार्यकाल के आधार पर पेंशन और भत्तों का लाभ मिलता रहेगा। इनमें सुधीर शर्मा, इंद्रदत्त लखनपाल, रवि ठाकुर और राजेंद्र राणा पहले भी विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। इसलिए उनके पिछले कार्यकाल की पात्रता के आधार पर उन्हें पेंशन मिलती रहेगी। उस समय तीन निर्दलीय विधायकों आशीष शर्मा, के एल ठाकुर और होशियार सिंह ने भी इस्तीफ़ा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इनमें उपचुनाव में आशीष शर्मा ही दोबारा जीत कर विधानसभा पहुंचे, जबकि होशियार सिंह और केएल ठाकुर को हार का सामना करना पड़ा था।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के कथन में भी कहा गया है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुरूप दलबदल को रोकना जरूरी है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए ऐसे प्रावधान आवश्यक हो गए हैं।

 

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

Chamba news : प्रथम चरण के मतदान के लिए सभी पोलिंग पार्टियां मतदान केन्द्रों पर पहुंचीं

एएम नाथ। चंबा :  उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) मुकेश रेपसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पंचायती राज सामान्य निर्वाचन-2026 के अंतर्गत प्रथम चरण के तहत मतदान के लिए सभी पोलिंग पार्टियां...
article-image
पंजाब , हिमाचल प्रदेश

टैगोर थियेटर में सजी संगीत की महफिल में देर रात तक गूंजे सदाबहार नगमे

ट्राइसिटी के 50 से ज्यादा गायक गायिकाओं ने दिखाया अपनी आवाज का जादू देवर्षि नारद जी की जयंती के उपलक्ष्य में बांटे लड्डू पुनीत महाजन। चंडीगढ़ : मिनी टैगोर थिएटर में बीते दिन संगीत...
article-image
दिल्ली , पंजाब , राष्ट्रीय , समाचार , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश

पंजाब पुलिस के रडार पर ब्रिटिश सेना का एक सिख सैनिक – स्टूडेंट वीजा पर गया था UK, फिर ज्वाइन की ब्रिटिश आर्मी और अफगानिस्तान में लड़ा युद्ध

चंडीगढ़ : पंजाब पुलिस और यूपी पुलिस ने सोमवार को पीलीभीत में एक ज्वाइंट ऑपरेशन में तीन खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराया। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि मारे गए आतंकियों को...
article-image
हिमाचल प्रदेश

व्यवस्था परिवर्तन का एक साल: धर्मशाला पहुंचेंगे 30 हजार लोग: पठानिया

धर्मशाला, 06 दिसंबर। विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का एक साल राज्य स्तरीय कार्यक्रम का धर्मशाला में भव्य आयोजन किया जाएगा इसमें राज्य भर से तीस हजार के करीब लोग...
Translate »
error: Content is protected !!