हिमाचल हाईकोर्ट की बड़ी राहत: बालिग युवक-युवती को लिव-इन रिलेशनशिप जारी रखने की मिली आजादी

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एएम नाथ। शिमला :  हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक बालिग युवक-युवती को बड़ी राहत देते हुए उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार साथ रहने और अपने रिश्ते को जारी रखने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने कहा कि जब दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी मर्जी से कोई निर्णय ले रहे हैं, तो उन्हें अपने निजी जीवन के संबंध में स्वतंत्र फैसला लेने का अधिकार है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने युवती की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत के समक्ष बताया गया कि दोनों की उम्र करीब 21 वर्ष है और वे जनवरी 2026 से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं।

युवक के माता-पिता को था रिश्ते पर एतराज

मामले के अनुसार, युवक के माता-पिता शुरुआत में दोनों के रिश्ते के विरोध में थे। याचिका में आरोप लगाया गया था कि माता-पिता युवक को उसकी इच्छा के विरुद्ध कांगड़ा स्थित घर ले गए और वहां रखा गया।

सुनवाई के दौरान युवक के माता-पिता भी अदालत में मौजूद रहे। उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि अब उन्हें युवक और युवती के रिश्ते पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने अदालत के समक्ष यह चिंता जरूर जताई कि युवक अभी पढ़ाई कर रहा है और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के उसके फैसले का उसकी शिक्षा पर असर पड़ सकता है।

हाईकोर्ट ने दोनों युवाओं की काउंसलिंग की

मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने दोनों युवाओं से बातचीत की और उनकी काउंसलिंग भी की। अदालत ने उन्हें अपने रिश्ते के साथ-साथ शिक्षा और भविष्य को लेकर भी गंभीर रहने की सलाह दी।

अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि दोनों बालिग हैं और अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रहना चाहते हैं। ऐसे में केवल माता-पिता की असहमति के आधार पर उन्हें अलग रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

दोनों अलग-अलग कंपनियों में कर रहे काम

अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि युवक और युवती दोनों अलग-अलग कंपनियों में काम करते हैं। दोनों ने स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा से साथ रहने और अपने संबंध को आगे जारी रखने की बात कही।

हाईकोर्ट ने दोनों की उम्र, स्वतंत्र इच्छा और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत के इस आदेश से दोनों युवाओं को अपनी पसंद के अनुसार साथ रहने की स्वतंत्रता मिली है।

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