नैतिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द की भावना को मजबूत करने का राज्यपाल ने किया आह्वान : युवाओं से शिक्षा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलकर महर्षि वाल्मीकि की विरासत को आगे बढ़ाने का किया आह्वान

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पालमपुर में अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के 19वें राष्ट्रीय अधिवेशन को किया संबोधित
एएम नाथ। शिमला : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि अनुच्छेद 370 निरस्त करना जम्मू-कश्मीर के लंबे समय से पीड़ित वाल्मीकि समाज को न्याय दिलवाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विशेष प्रावधान के कारण 70 वर्षों तक वाल्मीकि समुदाय को अन्याय, अधिकारों से वंचित रहने और भेदभाव का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के वाल्मीकि समाज को अब देश के नागरिकों के समान अधिकार, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
राज्यपाल ने आज पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के दो दिवसीय 19वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
इससे पूर्व, उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा महर्षि वाल्मीकि और डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित कर अधिवेशन का शुभारंभ किया।
देशभर से आए प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्वानों और वाल्मीकि समाज के सदस्यों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिससे जम्मू-कश्मीर में समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से वाल्मीकि समाज और गोरखा समुदाय के लोगों को न्याय मिला और उन्हें संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों पहले जम्मू लाए गए हजारों वाल्मीकि परिवार समाज की ईमानदारी और समर्पण से सेवा करने के बावजूद मूलभूत अधिकारों और अवसरों से वंचित रहे।
राज्यपाल ने कहा कि अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का वाल्मीकि समाज सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा है और देश के अन्य नागरिकों के समान अधिकारों का लाभ उठा रहा है। अब इस समुदाय के युवाओं को बेहतर शिक्षा, सरकारी नौकरियां, सामाजिक कल्याण योजनाओं और संवैधानिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है, जिससे वे दशकों तक वंचित रहे। उन्होंने इसे वाल्मीकि समाज के लिए सशक्तिकरण, समानता और सामाजिक न्याय के नए युग की शुरुआत बताया।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में नैतिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और यह समाज को सत्य, धर्म, करुणा और मानव सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है तथा समाज के सभी वर्गों को आगे बढ़ने के समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष, 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में युवाओं और महिलाओं का सशक्तिकरण एक मजबूत आधार बनकर उभरा है। स्वच्छ भारत मिशन को जन आंदोलन बनाने में वाल्मीकि समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने इसे ऐतिहासिक और निर्णायक बताया।
उन्होंने कहा कि देशभर से वाल्मीकि समाज के सदस्यों की इस अधिवेशन में सक्रिय भागीदारी स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक उत्थान और राष्ट्रीय एकता के प्रति यह समुदाय पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। उन्होंने युवाओं से महर्षि वाल्मीकि की विरासत को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, सेवा तथा सत्य और धर्म के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
इससे पूर्व, महासभा के पदाधिकारियों ने राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने उन्हें सम्मानित किया।
इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. पांडा, महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल राजा, कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम, महासचिव राकेश गिल, हिमाचल इकाई के अध्यक्ष दीपक लहौरवी, जूना अखाड़ा के यति निर्भयानंद सहित विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित थे।
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