पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, सीनेट चुनाव की हो रही मांग

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चंडीगढ़- पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव की तिथि की घोषणा की मांग को लेकर छात्रों ने सोमवार को प्रदर्शन किया। इस चुनाव में 91 सदस्यों का चयन होना है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच बहस हुई। पुलिस की मौजूदगी को देखते हुए छात्रों ने अपने समर्थकों से कहा कि जहां भी पुलिस उन्हें रोके, वहीं बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दें।

पुलिस ने एक द्वार को बंद कर दिया है और अन्य द्वारों पर कड़ी जांच की जा रही है। जब पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, तो छात्रों में आक्रोश फैल गया और वे द्वार खोलकर यूनिवर्सिटी में घुस गए। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। रविवार रात को भी इस मुद्दे पर छात्रों ने हंगामा किया और देर रात तक यूनिवर्सिटी के गेट पर धरना दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कंवरपाल कौर को खुद आना पड़ा।

छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए यूनिवर्सिटी में सोमवार और मंगलवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है। सुबह से ही छात्रों की भीड़ यूनिवर्सिटी में जुटने लगी है। छात्रों के आह्वान पर किसानों और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भी प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा के लिए दो हजार कर्मियों को तैनात किया है और पूरे शहर में 12 स्थानों पर नाकाबंदी की गई है। यूनिवर्सिटी में केवल उन्हीं लोगों को जाने की अनुमति है, जिनका कोई काम है, और उनके पहचान पत्र की जांच की जा रही है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट और सिंडिकेट को भंग किया गया। इससे छात्रों में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने अधिसूचना वापस ले ली। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों को अपने ही परिसर में प्रवेश से रोका जा रहा है। सुरक्षाकर्मियों द्वारा लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है।”

राजा वडिंग ने आगे कहा, “उनके पास वैध पहचान पत्र हैं – क्या यह लोकतंत्र है या छिपी हुई तानाशाही? पंजाब विश्वविद्यालय में आज शांतिपूर्ण छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की निंदा करने के लिए शब्द कम हैं। छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, क्योंकि उनका केंद्र सरकार पर से भरोसा उठ गया है।” प्रदर्शन के कारण चंडीगढ़ पुलिस ने अपने सभी बॉर्डर पर विशेष नाके लगाए हैं, जिससे जीरकपुर राजमार्ग पर जाम की स्थिति बन गई है।

गौरतलब है कि 28 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट को भंग करने की अधिसूचना जारी की थी। इस पर तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रिया आई। पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल चीमा और अन्य नेताओं ने इसे पंजाब और पंजाबियत को खत्म करने का प्रयास बताया। सभी ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को रद्द करने के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया। छात्रों ने भी आमरण अनशन शुरू किया था।

विरोध बढ़ने पर केंद्र सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट और सिंडिकेट भंग करने के फैसले को वापस लेते हुए नई अधिसूचना जारी की है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि सरकार ने अपनी हालिया अधिसूचनाओं से सबको गुमराह करने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और उच्च न्यायालय जाने की बात कही। छात्रों का विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सीनेट के सभी 91 सदस्यों की चुनाव तिथि की घोषणा नहीं की जाती।

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