एएम नाथ। नई दिल्ली/शिमला, 1 अक्तूबर। हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। इसी दौरान उन्होंने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हिमाचल प्रदेश से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
जयराम ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ हिमाचल से संबंधित विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई। हालांकि, बैठक में किन विशिष्ट मामलों या परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
वन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर नजर
भूपेंद्र यादव के पास पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का दायित्व है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए वन भूमि, पर्यावरणीय मंजूरियां, विकास परियोजनाओं से जुड़े पर्यावरणीय पहलू, वन संरक्षण, जैव विविधता और वनाग्नि जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में जयराम ठाकुर और केंद्रीय मंत्री के बीच हुई मुलाकात को प्रदेश से जुड़े वन एवं पर्यावरण मामलों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में किसी विशेष परियोजना या लंबित मामले को लेकर कोई निर्णय अथवा आश्वासन दिया गया या नहीं।
दिल्ली दौरे में कई मुलाकातें प्रस्तावित
जयराम ठाकुर का दिल्ली दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हिमाचल से जुड़े कई मुद्दे प्रदेश की राजनीति में चर्चा में हैं। उनके केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातों का कार्यक्रम प्रस्तावित बताया जा रहा है।
जयराम ठाकुर इससे पहले भी दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर हिमाचल से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। मार्च 2026 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर प्रदेश से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की थी।
सुक्खू के दिल्ली दौरे के बीच बढ़ी राजनीतिक चर्चा
एक ओर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के बीच दिल्ली में बैठकों का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकातें हिमाचल की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
अब जयराम ठाकुर की दिल्ली में होने वाली आगामी मुलाकातों और उनमें उठाए जाने वाले हिमाचल से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। इन बैठकों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश से जुड़े किन मामलों को केंद्रीय स्तर पर प्रमुखता से रखा गया।
