2018 में तैयार हुई थीं पुनर्जीवन कार्ययोजनाएं; अब केंद्र देखेगा—जमीन पर कितना हुआ काम और पानी की गुणवत्ता में कितना आया सुधार
एएम नाथ। शिमला: हिमाचल प्रदेश की सात प्रदूषित नदी धाराओं को पुनर्जीवित करने की वर्षों पुरानी कवायद अब एक बार फिर केंद्रीय निगरानी के दायरे में आ गई है। वर्ष 2018 में प्रदूषित नदी खंडों की पहचान कर उनके लिए कार्ययोजनाएं तैयार किए जाने के बाद अब केंद्र स्तर पर यह समीक्षा होगी कि प्रदूषण रोकने के लिए तय उपायों को जमीन पर कितना लागू किया गया और इससे नदी जल की गुणवत्ता में कितना वास्तविक सुधार आया।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से जुड़े मामले में केंद्रीय निगरानी समिति की 22वीं बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होगी। हिमाचल प्रदेश के पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जल शक्ति विभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। प्रदेश की ओर से सातों प्रदूषित नदी खंडों की वर्तमान स्थिति और अब तक लागू की गई कार्ययोजनाओं की प्रगति प्रस्तुत की जाएगी।
इन सात नदी खंडों पर रहेगी नजर
एनजीटी से जुड़े मामले में हिमाचल की सुखाना, मारकंडा, सिरसा, अश्वनी, ब्यास, गिरि और पब्बर नदी धाराओं को प्रदूषित नदी खंडों के रूप में चिह्नित किया गया था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पहचान के बाद वर्ष 2018 में राज्य सरकार ने इनके पुनर्जीवन के लिए नदी पुनर्जीवन समिति गठित की और अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार की थीं।
अब केंद्रीय निगरानी समिति यह देखेगी कि इन कार्ययोजनाओं के तहत निर्धारित उपायों को किस स्तर तक लागू किया गया और उनका धरातल पर क्या परिणाम सामने आया।
सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, परिणाम भी होंगे अहम
समीक्षा में केवल नदी के पानी की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण की स्थिति भी महत्वपूर्ण रहेगी। राज्य को सीवेज उपचार, सीवेज शोधन संयंत्रों की कार्यशीलता, औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण, प्रदूषित पानी को नदियों में जाने से रोकने और नदी जल की गुणवत्ता में हुए बदलाव से संबंधित जानकारी देनी होगी।
यानी अब सवाल केवल यह नहीं होगा कि कार्ययोजनाएं बनाई गईं या नहीं, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उन पर अमल कितना हुआ और उससे प्रदूषण कम करने में कितना असर पड़ा।
सात साल बाद बड़ा सवाल—कितनी बदली स्थिति?
वर्ष 2018 में प्रदूषित घोषित किए गए इन नदी खंडों को सात वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। इस अवधि में राज्य ने संस्थागत व्यवस्था और पुनर्जीवन कार्ययोजनाएं तैयार की हैं। ऐसे में आगामी बैठक में इन प्रयासों के वास्तविक नतीजे महत्वपूर्ण रहेंगे।
खास तौर पर नदी जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ या नहीं, सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण पर कितना नियंत्रण पाया गया तथा नदी में प्रदूषित पानी की एंट्री रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए—इन बिंदुओं पर केंद्रीय निगरानी समिति की नजर रहेगी।
2024 में हुई थी 18वीं बैठक
इन नदी खंडों को लेकर हिमाचल से पहले भी प्रगति रिपोर्ट मांगी जाती रही है। केंद्रीय निगरानी समिति की 18वीं बैठक 11 जनवरी 2024 को हुई थी। अब 22वीं बैठक में प्रदेश की मौजूदा स्थिति और कार्ययोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति सामने रखी जाएगी।
केंद्र की नजर इन बिंदुओं पर
- सीवेज उपचार और शोधन संयंत्रों की कार्यशीलता
- औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण
- प्रदूषित पानी को नदी में जाने से रोकने के उपाय
- नदी जल की गुणवत्ता में आया बदलाव
- स्वीकृत कार्ययोजनाओं का क्रियान्वयन
- प्रदूषण कम करने के उपायों का वास्तविक प्रभाव
देश में प्रदूषित नदी खंड घटे, हिमाचल की स्थिति पर भी नजर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार देशभर में प्रदूषित नदी खंडों की संख्या में पिछले वर्षों में कमी दर्ज की गई है। मार्च 2026 में केंद्र की ओर से बताया गया था कि वर्ष 2018 में देश में चिन्हित 351 प्रदूषित नदी खंडों की संख्या वर्ष 2025 में घटकर 296 रह गई, जबकि 71 नदी खंडों में जल गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया।
ऐसे में हिमाचल की सात चिन्हित नदी धाराओं की मौजूदा स्थिति और वर्षों से चल रही पुनर्जीवन कार्ययोजनाओं के परिणामों की समीक्षा पर भी नजर रहेगी।
