आउटसोर्स नीति पर विधायक डॉ. हंस राज ने उठाए सवाल …चम्बा-तीसा के युवाओं के हितों की पैरवी

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चम्बा-तीसा के युवाओं को भर्ती में समान अवसर देने की उठाई मांग

आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य और रोजगार सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति पर जोर

आउटसोर्स व्यवस्था पर फिर गरमाया मुद्दा, हजारों कर्मचारियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल

एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान चुराह विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. हंस राज ने मौजूदा आउटसोर्स नीति को लेकर सरकार के समक्ष सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में आउटसोर्स के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में पारदर्शिता, मेरिट और आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने चम्बा जिला, विशेषकर तीसा और चुराह क्षेत्र के शिक्षित युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था की समीक्षा की मांग की।
डॉ. हंस राज ने कहा कि आउटसोर्स नियुक्तियों में सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा व्यवस्था में भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और क्या दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को भी अन्य क्षेत्रों के अभ्यर्थियों के समान अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चम्बा और तीसा जैसे दुर्गम क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पहले ही सीमित हैं, इसलिए सरकारी एवं आउटसोर्स नियुक्तियों में निष्पक्षता बेहद जरूरी है।
विधायक ने कहा कि निजी एजेंसियों के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में कर्मचारियों के अधिकार, वेतन, सेवा शर्तों और रोजगार सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल खड़े होते हैं। लंबे समय से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को स्पष्ट और स्थायी नीति बनानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी नौकरियों में संविधान के तहत आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में आउटसोर्स नियुक्तियों में भी आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। चयन प्रक्रिया में मेरिट और समान अवसर के साथ सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना जरूरी है।
डॉ. हंस राज ने कहा कि आउटसोर्स नीति केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से मांग की कि नीति में आवश्यक सुधार कर चम्बा, तीसा और अन्य दुर्गम क्षेत्रों के युवाओं को भी रोजगार के समान अवसर उपलब्ध करवाए जाएं।
विधानसभा में इस मुद्दे के उठने से आउटसोर्स कर्मचारियों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं में सरकार की आगामी नीति को लेकर उम्मीद जगी है। अब सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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