तीन साल के लिए मिलेगा प्रमाणपत्र, नवीनीकरण शुल्क 25 हजार रुपये; नियम तोड़ने पर जुर्माना और पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान
ऊना, 12 अक्टूबर। ऊना जिले में संचालित सभी पात्र निजी कोचिंग सेंटरों को अब निर्धारित नियमों के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के लिए 50 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि प्रमाणपत्र तीन साल तक वैध रहेगा। नवीनीकरण के लिए 25 हजार रुपये जमा करवाने होंगे। अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) इशांत जसवाल ने कोचिंग सेंटर संचालकों को नियमों का पालन करने तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
एडीसी ने बताया कि पंजीकरण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जिला स्तरीय कमेटी की बैठक में चर्चा की गई है। निर्धारित आवेदन पत्र भरकर उप निदेशक, उच्च शिक्षा, ऊना के कार्यालय में जमा करवाना होगा। आवेदनों की जांच जिला स्तरीय कमेटी करेगी और सभी निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले संस्थानों को तीन साल की वैधता वाला प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। आवेदन में कमियां पाए जाने पर उन्हें दूर करने के लिए अधिकतम तीन महीने का समय दिया जा सकेगा।
विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाएं अनिवार्य
कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार पर्याप्त कक्षाएं, उचित रोशनी, बेहतर वेंटिलेशन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अग्नि सुरक्षा सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवानी होंगी। इसके अलावा शिक्षण व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन करना भी अनिवार्य रहेगा।
फीस और रिकॉर्ड में रखनी होगी पारदर्शिता
संचालकों को विद्यार्थियों के प्रवेश, फीस और उपस्थिति सहित जरूरी रिकॉर्ड अद्यतन रखना होगा। ट्यूशन फीस और अन्य शुल्कों में पारदर्शिता बनाए रखना भी जरूरी होगा। पंजीकृत सेंटर को अपना स्थान बदलने से पहले संबंधित प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी।
शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
एडीसी ने बताया कि कोचिंग सेंटरों के कामकाज की समय-समय पर निगरानी की जाएगी। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने और आवश्यक परिस्थितियों में पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान है। पंजीकरण संबंधी निर्णय से असंतुष्ट संचालक निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकेंगे।
एडीसी इशांत जसवाल ने सभी पात्र निजी कोचिंग सेंटर संचालकों से पंजीकरण करवाने और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, जरूरी सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े प्रावधानों का अनुपालन करना संस्थानों की जिम्मेदारी है।
