ओपीएस और अन्य कल्याणकारी योजनाएं रहेंगी जारी : मुख्यमंत्री सुक्खू

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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा, भाजपा ने जानबूझकर आरडीजी प्रस्तुति का बहिष्कार किया

अपने कार्यकाल में भाजपा ने किया है आरडीजी का दुरुपयोग

एएम नाथ। शिमला :  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त करने के बावजूद राज्य सरकार की पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और सभी प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जनता के अधिकारों और हितों की हर हाल में रक्षा करेगी।
मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भाजपा सत्ता में होती, तो ओपीएस को हटाकर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू कर दी जाती, जिससे सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार से आने के कारण वे आम लोगों की परेशानियों को भली-भांति समझते हैं और उनकी सरकार कभी भी जनहित से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन भले ही वित्त विभाग देखता हो, लेकिन सरकार का मुख्य उद्देश्य संसाधनों को मजबूत करना और विकास को गति देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष, 2018 से 2021 तक जय राम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार के कुप्रबंधन और फिजूल खर्ची के कारण आज प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य को लगभग 54,000 करोड़ रुपये आरडीजी और 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में मिले, लेकिन इनका उपयोग पूंजीगत विकास के बजाय ठेकेदारों को खुश करने में किया गया। उन्होंने कहा कि करीब 1,000 करोड़ रुपये ऐसी इमारतों पर खर्च किए गए जो आज खाली पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,000 करोड़ रुपये आरडीजी प्राप्त हुए हैं, फिर भी राज्य सरकार ने सख्त वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 26,683 करोड़ रुपये अपने संसाधनों से जुटाए हैं और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए और कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा से जनता को गुमराह करने के बजाय केंद्र सरकार से राज्य के अधिकारों की लड़ाई में सहयोग करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाला आरडीजी राज्यों के राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य के बजट पर गंभीर असर डालेगा। उन्होंने आरडीजी समाप्त किए जाने को प्रदेश के प्रति केंद्र सरकार का ‘सौतेला व्यवहार’ बताया और कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हिमाचल प्रदेश एक राजस्व घाटा राज्य बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि वे आरडीजी की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे और राज्य के हक के लिए हर मंच पर लड़ाई लड़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष द्वारा भाजपा विधायकों को वित्तीय प्रस्तुति के लिए आमंत्रित नहीं किए जाने के आरोप को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत रूप से लिखित निमंत्रण भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर बैठक में शामिल न होने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल प्रदेश के हित और जनता के कल्याण के लिए एकजुट होने की अपील की।

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