पीड़िता की पुनरीक्षण याचिका खारिज; अदालत ने कहा- मुख्य चश्मदीद ही आरोपों का खंडन कर रहा हो तो केवल शिकायतकर्ता के बयान पर आरोपी को समन नहीं किया जा सकता
शिमला। एएम नाथ। । हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली के एक नामी होटल में कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस की ओर से दाखिल कैंसिलेशन (क्लोजर) रिपोर्ट को सही ठहराया है। न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने पीड़िता की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल शिकायतकर्ता के हलफनामे या बयानों के आधार पर किसी आरोपी को समन जारी करना उचित नहीं है, विशेषकर तब जब मामले की मुख्य चश्मदीद गवाह ही लगाए गए आरोपों का खंडन कर रही हो।
2024 में दर्ज हुई थी शिकायत
पीड़िता ने 13 दिसंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 3 जुलाई 2023 को कसौली के एक नामी होटल में हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और गायक रॉकी मित्तल ने उसे और उसकी सहेली को कथित तौर पर नशीला पदार्थ पिलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की और बाद में अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की।
चश्मदीद के बयान को अदालत ने माना महत्वपूर्ण
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष जांच से जुड़ी सामग्री और गवाहों के बयानों पर विचार किया गया। अदालत ने विशेष रूप से इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि जिस व्यक्ति को मामले का मुख्य चश्मदीद बताया गया, उसके बयान कथित घटना और शिकायत में लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं करते थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले में किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर समन करने के लिए उपलब्ध सामग्री का न्यायिक मूल्यांकन जरूरी है। केवल शिकायतकर्ता के बयान या हलफनामे के आधार पर, अन्य महत्वपूर्ण सामग्री के विपरीत जाने वाला आदेश उचित नहीं माना जा सकता।
पुलिस की जांच पर आधारित क्लोजर रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच के बाद दाखिल कैंसिलेशन रिपोर्ट को बरकरार रखा और पीड़िता की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। अदालत के फैसले का आधार उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का मूल्यांकन रहा।
18 महीने की देरी पर उठे सवाल; सहेली ने घटना से किया इनकार, मेडिकल जांच से भी पीड़िता ने मना किया था
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली के एक नामी होटल में कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस की ओर से दाखिल कैंसिलेशन रिपोर्ट को सही ठहराया है। न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने पीड़िता की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल शिकायतकर्ता के हलफनामे या बयानों के आधार पर आरोपी को समन जारी करना उचित नहीं है, खासकर तब जब मामले की मुख्य चश्मदीद गवाह ही घटना से इनकार कर रही हो।
