16,500 मेगावाट के पार पहुंची बिजली की मांग, केंद्रीय पूल से 11,770 मेगावाट खरीदने की नौबत; ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे कट, शहरों में भी ट्रिपिंग
चंडीगढ़। सतलुज ब्यास टाइम्स। पंजाब में बिजली की बढ़ती मांग और थर्मल प्लांटों की प्रभावित जनरेशन के चलते बिजली संकट गहराता जा रहा है। तलवंडी साबो और राजपुरा के प्राइवेट थर्मल प्लांटों की एक-एक यूनिट बंद रहने से बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। सरकारी प्लांट की यूनिट भी बंद रही। दूसरी ओर बिजली की मांग 16,500 मेगावाट से ऊपर पहुंचने के कारण पीएसपीसीएल को केंद्रीय पूल से भारी मात्रा में बिजली खरीदनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे बिजली कट लग रहे हैं, जबकि लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, पठानकोट, बठिंडा, पटियाला और होशियारपुर सहित कई शहरों में भी बार-बार बिजली ट्रिप होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
तलवंडी साबो में 20 दिन का कोयला स्टॉक
तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के पीआरओ अभिषेक शर्मा के अनुसार प्लांट में करीब 20 दिन का कोयला स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई लगातार मिल रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ यूनिटें तकनीकी खराबी के कारण मरम्मत के लिए बंद हैं।
वहीं पीएसपीसीएल अधिकारियों के अनुसार कोयले की सप्लाई जारी है, लेकिन जरूरत के मुकाबले पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रही, जिससे जनरेशन प्रभावित हो रही है।
कम बारिश से भी बढ़ी बिजली की मांग
इस बार पंजाब में बारिश कम होने के कारण धान की फसल के लिए किसानों को ट्यूबवेल ज्यादा चलाने पड़ रहे हैं। इससे कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ी है। बढ़ती मांग और कम जनरेशन के बीच अंतर को पूरा करने के लिए पीएसपीसीएल को केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
रात में सोलर का सहारा नहीं
दिन के समय सोलर प्रोजेक्टों से करीब 385 मेगावाट बिजली मिल रही है, लेकिन रात में सोलर उत्पादन बंद हो जाता है। ऐसे में रात के समय थर्मल और अन्य स्रोतों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
केंद्रीय पूल से 11,770 मेगावाट बिजली खरीद
मौजूदा स्थिति में पंजाब करीब 11,770 मेगावाट बिजली केंद्रीय पूल से खरीद रहा है। अपनी जनरेशन कम होने और मांग लगातार बढ़ने के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।
अगर बंद पड़ी थर्मल यूनिटें जल्द पूरी क्षमता से चालू नहीं होतीं और बिजली की मांग इसी स्तर पर बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में लंबे बिजली कटों की समस्या और बढ़ सकती है।
