एएम नाथ। धर्मशाला, 29 सितंबर। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में इस वर्ष मानसून के दौरान भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से व्यापक नुकसान हुआ। सड़क, पेयजल, सिंचाई, बिजली, कृषि, बागवानी, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है।
नुकसान का जायजा लेने पहुंचे अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) ने मंगलवार को धर्मशाला में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। इससे पहले केंद्रीय दल ने आपदा प्रभावित बोह घाटी का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु ने की।
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने केंद्रीय दल को मानसून के दौरान जिले में हुए नुकसान और अब तक किए गए राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
आपदा में 15 लोगों की मौत, 76 पशुधन का नुकसान
उपायुक्त ने बताया कि मानसून के दौरान विभिन्न आपदा घटनाओं में 15 लोगों की मौत हुई, जबकि 76 पशुधन का नुकसान हुआ। सड़क, पेयजल, बिजली, कृषि, बागवानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची।
854 किलोमीटर सड़कें प्रभावित, 269.77 करोड़ का नुकसान
नूरपुर, देहरा और पालमपुर सर्कल में करीब 854 किलोमीटर सड़कें प्रभावित हुईं। इससे लगभग 269.77 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है।
जिले में 428 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुईं, जिससे करीब 64.06 करोड़ रुपये की क्षति हुई। इनमें से 330 पेयजल योजनाओं को अस्थायी रूप से बहाल किया जा चुका है।
बिजली, शिक्षा और कृषि क्षेत्र भी प्रभावित
एचटी और एलटी बिजली लाइनों तथा बिजली के खंभों के उखड़ने से राज्य विद्युत निगम को करीब 204.57 लाख रुपये का नुकसान हुआ। फसलों को हुए नुकसान से कृषि क्षेत्र में 63.97 लाख रुपये, स्वास्थ्य क्षेत्र में 75 लाख रुपये, शिक्षा क्षेत्र में 2.57 करोड़ रुपये और बागवानी क्षेत्र में 10.73 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है।
आपदा पीड़ितों की सहायता 1.30 लाख से बढ़ाकर 8 लाख
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास देने के लिए अपने संसाधनों से सहायता राशि को 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये किया है।
उन्होंने केंद्रीय दल से प्राकृतिक आपदा के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के मौजूदा मापदंडों में संशोधन की सिफारिश करने का आग्रह किया, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों को पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सके।
