गुल्लरवाला में श्रीमद्भागवत कथा का पांचवा दिन : भागवत में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथावाचक ऋषि गौतम द्वारा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की सुनाई कथा

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बद्दी,  (तारा) :  बद्दी उप मंडल के गुल्लरवाला के ऐतिहासिक दुर्गा माता मंदिर परिसर में समस्त ग्रामवासियों द्वारा 15 जून तक साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के पांचवे दिन क्षेत्र के प्रसिद्ध कथावाचक ऋषि गौतम द्वारा अपने मुखारविंद से प्रवचनों की वर्षा की जा रही है। शुक्रवार को कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्म की कथा सुनाई।
कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मथुरा के कारागार (जेल) में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में आधी रात के समय हुआ था। उनके पिता वासुदेव और माता देवकी थीं। उन्होंने बताया कि कंस का अत्याचार और आकाशवाणी मथुरा के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी के विवाह के समय एक आकाशवाणी सुनी थी कि देवकी का आठवां पुत्र ही कंस की मृत्यु का कारण बनेगा। इस भविष्यवाणी से भयभीत होकर कंस ने देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार में डाल दिया। कंस ने अपनी बहन की एक-एक कर जन्मी पहली छह संतानों को जन्म लेते ही मौत के घाट उतार दिया। श्रीकृष्ण का जन्म जब देवकी के गर्भ से सातवीं संतान के रूप में बलराम जी आए, तो भगवान विष्णु की माया से उन्हें गोकुल में रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद, भाद्रपद की अष्टमी तिथि को आधी रात के समय स्वयं भगवान विष्णु ने आठवें पुत्र के रूप में देवकी की कोख से अवतार लिया। श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए, लोहे की जंजीरें अपने आप खुल गईं और जेल के भारी दरवाजे स्वतः ही खुल गए।
कंस के भय से वासुदेव उसी रात भारी बारिश और तूफ़ान के बीच अपने नवजात शिशु को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार की। वे गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के घर पहुंचे, जहाँ यशोदा मैया ने भी हाल ही में एक कन्या को जन्म दिया था। वासुदेव, श्रीकृष्ण को यशोदा जी के पास सुलाकर उस कन्या को वापस मथुरा ले आए।。गोकुल में पालन-पोषण जब कंस ने उस नवजात कन्या को मारने का प्रयास किया, तो वह कन्या आकाश में उड़ गई और देवी महामाया (योगमाया) का रूप धारण करके कंस को चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला पहले ही सुरक्षित स्थान पर जन्म ले चुका है। इसके बाद भगवान कृष्ण का पालन-पोषण गोकुल में नंदराय और माता यशोदा की देखरेख में हुआ। कथावाचक ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का यह पावन पर्व जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है, जिसमें श्रद्धालु आधी रात तक व्रत रखकर भगवान की स्तुति, भजन और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
इस अवसर पर गुरचरण सिंह गुल्लरवाला पंचायत के उप प्रधान ज्ञान चंद, पूर्व उप प्रधान पम्मी राम, सीता राम चौधरी, प्रकाश, गुरनाम, मेला राम, रोशन लाल, भंगी राम, डॉ भाग सिंह चौधरी, रामलोक, परमजीत सिंह, मघर सिंह, तारा चंद, सुरिंदर सिंह, भाग सिंह, दिला राम, बहादुर सिंह, डॉ राम आसरा, ज्ञान सिंह, सोमा देवी, सोचा देवी, तारा कश्यप, बगो देवी, मनजीत कौर, गुरमीत कौर आदि दर्जनों गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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