पीएमएलए की विशेष अदालत ने कहा- आरोपी दोहरी कानूनी शर्तें पूरी करने में विफल; जांच से बचने के पूर्व आचरण और मामले की गंभीरता को भी माना अहम आधार
एएम नाथ। शिमला। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिमालयन और एपेक्स ग्रुप के चेयरमैन रजनीश बंसल को अदालत से राहत नहीं मिली है। विशेष अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत निर्धारित दो अनिवार्य शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है।
अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच से बचने के आरोपी के पूर्व आचरण को भी जमानत न देने का आधार माना। कोर्ट के अनुसार, इन परिस्थितियों में आरोपी को सामान्य जमानत के आधार पर भी राहत नहीं दी जा सकती।
ईडी ने बताई आरोपी की प्रथमदृष्टया भूमिका
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में दलील दी कि जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों से मामले में आरोपी की मुख्य भूमिका प्रथमदृष्टया सामने आती है। ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए जांच में सामने आए तथ्यों और मामले की गंभीरता का हवाला दिया।
63 हजार दस्तावेज और 107 गवाहों का दिया गया हवाला
रजनीश बंसल की ओर से जमानत याचिका में दलील दी गई थी कि मामले में 63 हजार से अधिक दस्तावेज और 107 गवाह हैं। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लग सकता है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि बंसल वर्तमान में आईजीएमसी के मनोरोग वार्ड में उपचाराधीन हैं। इस आधार पर मानवीय और चिकित्सकीय परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने की मांग की गई थी।
हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
