तिवारी ने सिडनी में ऑस्ट्रेलिया–भारत रणनीतिक संवाद में की शिरकत

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चंडीगढ़, 18 मई: पूर्व केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री और चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने आज सिडनी में शुरू हुए दो दिवसीय पहले ऑस्ट्रेलिया–भारत ट्रैक 1.5 रणनीतिक संवाद में हिस्सा लिया। इस संवाद के दौरान सरकार, उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के नेताओं ने व्यापार, निवेश, आर्थिक मजबूती और ऑस्ट्रेलिया–भारत रणनीतिक साझेदारी के भविष्य पर विचार-विमर्श किया।

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों और व्यापार विभाग द्वारा स्ट्रैटेजिक एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी इनिशिएटिव (एसएटीपीआई) के माध्यम से तथा भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस ऑस्ट्रेलिया–भारत ट्रैक 1.5 रणनीतिक संवाद ने साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय मंच के रूप में कार्य किया। यह संवाद अनंता एस्पेन सेंटर (भारत) के सहयोग से आयोजित किया गया।

तिवारी, जो भारत–ऑस्ट्रेलिया संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष भी हैं, ने ‘भू-राजनीति और रणनीतिक संतुलन: बदलते वैश्विक ध्रुवों के दौर में भारत-ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक प्रतिक्रियाएं’ विषय पर आयोजित सत्र के दौरान विस्तार से अपने विचार रखे। तिवाड़ी ने कहा कि इस पहले संवाद का केंद्र ऑस्ट्रेलिया–भारत आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना था, जिसमें ‘भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक भागीदारी के नए रोडमैप’ को व्यावहारिक रूप देने पर विशेष जोर दिया गया।

तिवारी की भागीदारी ने भारत के संसदीय और नीतिगत दृष्टिकोण को उजागर किया, जिसमें वैश्विक अस्थिरता और क्षेत्रीय साझेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चीन की बढ़ती दखलअंदाजी का मुकाबला करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की मजबूती तथा विश्वसनीय तकनीकों और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने संबंधी साझा दृष्टिकोण को रेखांकित किया। संवाद के दौरान व्यापक रणनीतिक साझेदारी, पारस्परिक लॉजिस्टिक सहायता समझौता और समुद्री सुरक्षा सहयोग जैसे मौजूदा ढांचों को भी मजबूत किया गया।

संवाद के पहले दिन के पहले सत्र में भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर चर्चा हुई, जबकि दूसरे सत्र में भू-राजनीति और रणनीतिक संतुलन पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान अमेरिकी टैरिफ नीतियों, चीन के जवाबी कदमों और मध्य-पूर्व में अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन, बाजार पहुंच और आर्थिक सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभावों की समीक्षा की गई। सत्र का केंद्र यह था कि भारत और ऑस्ट्रेलिया नीति, निवेश और कूटनीति के माध्यम से किस प्रकार संयुक्त रूप से जोखिमों को कम कर सकते हैं और चुनौतियों को साझेदारी आधारित सहयोग में बदल सकते हैं। तीसरे सुबह के पैनल में व्यापार और निवेश पर चर्चा हुई, जिसमें आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते तथा जारी सीईसीए वार्ताओं को व्यावसायिक रूप से लाभकारी परियोजनाओं, द्विपक्षीय निवेश वृद्धि और नियामक सामंजस्य में बदलने पर विचार किया गया। इस दौरान स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।

दोपहर के समय बंद कमरे में आयोजित सत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के विशेष क्षेत्रों पर चर्चा की गई। पहला सत्र महत्वपूर्ण खनिजों पर केंद्रित था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया में बैटरियों और स्वच्छ ऊर्जा के लिए प्रोसेसिंग एवं रिफाइनिंग क्षेत्र में भारतीय कंपनियों की बढ़ती रुचि, संयुक्त उपक्रमों और तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई। दूसरे सत्र में ऊर्जा सुरक्षा पर बातचीत हुई, जिसमें कच्चे तेल और एलपीजी सप्लाई चेन की मजबूती के लिए दीर्घकालिक व्यवस्थाओं, स्टोरेज और लॉजिस्टिक सहयोग के व्यावहारिक तरीकों की पड़ताल की गई। जबकि तीसरे सत्र में लोगों, कौशल और साझेदारियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें प्रतिभा आदान-प्रदान, शैक्षणिक संबंध, प्रवासी उद्यमिता और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पहलों के माध्यम से आर्थिक सहयोग के अगले चरण को मजबूत करने पर विचार किया गया। दिन का समापन एक औपचारिक रात्रिभोज और नेटवर्किंग कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसने ट्रैक 1.5 प्रारूप की रणनीतिक चर्चा और संबंध निर्माण के मिश्रित स्वरूप को दर्शाया।

औपचारिक सत्रों के अलावा, तिवारी ने सिडनी में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस द्वारा आयोजित प्रवासी भारतीय कार्यक्रमों में भी भाग लिया और सांस्कृतिक एवं राजनीतिक संबंधों को और मजबूत किया। यह संवाद भारत–ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक सहयोग को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जो नीतिगत सहमति से आगे बढ़ते हुए रक्षा, तकनीक और आर्थिक साझेदारी में व्यावहारिक सहयोग की ओर केंद्रित है।

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