दुनिया जब उम्मीद कर रही थी कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की वार्ता से शांति का रास्ता निकलेगा, तभी ओमान सागर से आई एक खबर ने पूरी दुनिया को दहला दिया है।
सीजफायर की अवधि खत्म होने में अभी तीन दिन बाकी थे, लेकिन इससे पहले ही ईरान ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर भीषण ‘ड्रोन अटैक’ कर दिया है। यह हमला उस वक्त हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचने ही वाले थे। अब सवाल यह है कि क्या बातचीत की मेज सजने से पहले ही यह ‘महाजंग’ में तब्दील हो जाएगी?
ओमान सागर में ‘ड्रोन स्ट्राइक’ और बढ़ता तनाव
तसनीम न्यूज एजेंसी और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी बलों ने ओमान सागर में तैनात अमेरिकी सेना के जहाजों को निशाना बनाया है। बताया जा रहा है कि यह हमला ईरान के एक जहाज पर हुई अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने अभी तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन अमेरिकी रक्षा सूत्रों ने ड्रोन के जरिए जहाजों को निशाना बनाए जाने की बात कही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस हमले में कितना नुकसान हुआ है, लेकिन इसने इस्लामाबाद में होने वाली कूटनीतिक कोशिशों को गहरे संकट में डाल दिया है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी: ‘अब और शराफत नहीं’
इस हमले से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि अगर ईरान एक उचित और तर्कसंगत समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के हर एक ‘पावर प्लांट’ और हर एक ‘पुल’ को नष्ट कर देगा। ट्रंप ने गुस्से में लिखा, “अब और शराफत नहीं! वे बहुत जल्दी और आसानी से गिर जाएंगे।” उन्होंने ईरान को ‘हत्यारी मशीन’ करार देते हुए कहा कि वह काम करना उनके लिए सम्मान की बात होगी जो पिछले 47 वर्षों में किसी अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं किया।
900 फीट लंबे ईरानी जहाज ‘तूसका’ पर कार्रवाई
तनाव की ताजा वजह 900 फीट लंबे ईरानी मालवाहक जहाज ‘तूसका’ के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को माना जा रहा है। ट्रंप ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि एक विमानवाहक पोत जितने भारी इस जहाज ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी, जो उनके लिए भारी पड़ी। ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर के उल्लंघन का आरोप भी लगाया और कहा कि ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फायरिंग करना समझौते का अपमान है। उनके मुताबिक, ईरान की इस जिद की वजह से उसे रोजाना 500 मिलियन डॉलर का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर फिरा पानी!
पाकिस्तान पिछले कई दिनों से इस वार्ता के लिए जमीन तैयार कर रहा था। इस्लामाबाद के होटलों को खाली कराया गया था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। लेकिन ईरान के इस ताजा हमले ने पाकिस्तान की मेहनत पर पानी फेर दिया है। अब जबकि अमेरिका के प्रतिनिधि बातचीत के लिए पहुंच रहे हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे मेज पर बैठेंगे या ट्रंप अपनी उस धमकी को सच कर दिखाएंगे जिसमें उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह करने की बात कही है। पूरी दुनिया अब सांसें थामकर युद्ध के इस नए मोड़ को देख रही है।
