देवबंद से त्रिलोकपुर आई थी नमक की बोरी में पिंडी के रूप में माता बालासुंदरी : माता बालासुंदरी त्रिलोकपुर मेला 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2024

by
एएम नाथ।  नाहन :  महामाया बाला सुंदरी का भव्य मंदिर सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन से करीब 22 किलोमीटर दूर त्रिलोकपुर नामक स्थल पर विराजमान है। त्रिलोकपुर का नाम तीन शक्ति मंदिरों से निकला है जिनमें मां ललिता देवी, बाला संुदरी और त्रिपुर भैरवी शामिल हैं। मां बालासुंदरी सिरमौर जिला के अलावा साथ लगते हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड आदि विभिन्न क्षेत्रों की भी अधिष्ठात्री देवी है।
*देवबन्द से नमक की बोरी में त्रिलोकपुर आई माता बालासुंदरी*
लोक गाथा के अनुसार महामाई बालासुंदरी उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के देवबंद स्थान से नमक की बोरी में त्रिलोकपुर आई थी। लाला रामदास त्रिलोकपुर स्थान में नमक का व्यापार करते थे और उन्हीं की नमक की बोरी में महामाई 1573 ई. में त्रिलोकपुर पधारी थीं।
कहा जाता है कि लाला रामदास ने देवबंद से जो नमक लाया था, उसे अपनी दुकान में बेचने के बाद भी बोरी से नमक कम नहीं हुआ। इस पर लाला राम दास अचंभित हुये। लाला राम दास त्रिलोकपुर में नित्य प्रति उस पीपल को जल अर्पित करके पूजा करते थे।
एक रात्रि महामाया बालासुंदरी लाला रामदास के सपने में आई और उन्हें दर्शन देते हुए कहा कि-‘‘मैं तुम्हारी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हॅूं। मैं इस पीपल के नीचे पिंडी रूप में स्थापित हो गई हूं। तुम इस स्थल पर मेरा मंदिर बनवाओ।’’
लाला जी को मंदिर निर्माण की चिंता सताने लगी। उन्होंने इतने बड़े भवन के निर्माण के लिये धनाभाव तथा सुविधाओं की कमी का महसूस करते हुए माता की अराधना की।
*सिरमौर नरेश प्रदीप प्रकाश ने बनवाया माता बालासुंदरी का मंदिर*
इसी बीच मां बालासुंदरी ने अपने भक्त की पुकार सुनते हुए राजा प्रदीप प्रकाश को स्वप्न में दर्शन देकर भवन निर्माण का आदेश दिया।
राजा प्रदीप प्रकाश ने जयपुर से कारीगरों को बुलाकर तुरंत ही मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ करवा दिया। यह भवन निर्माण सन 1630 में पूरा हो गया।
त्रिलोकपुर मंदिर क्षेत्र का एक सुप्रसिद्ध मंदिर है जहां साल भर बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं। मंदिर में विशेषकर नवरात्रों में मेले के दौरान हिमाचल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा उत्तराखंड से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिये आते हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना करके देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं जिससे श्रद्धालुओं को एक अलग सी अनुभूति प्राप्त होती है।
त्रिलोकपुर में वर्ष में दो बार मेला लगता है जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। चैत्र तथा आश्विन नवरात्रों में ये मेले लगते हैं। चैत्र माह में लगने वाले मेले को बड़ा मेला और अश्विन माह में लगने वाले मेले को छोटा मेला कहा जाता है।
इस बार चैत्र नवरात्र मेला 09 अप्रैल से 23 अप्रैल 2024 तक धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है।
Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब , समाचार

अफगानी नागरिकों से पकड़ी 17 किलो हैरोइन के बाद अंतर्राज्यीय नशा तस्करों के रैकेट का पर्दाफाश, जिला पुलिस की टीमों की ओर से दिल्ली, उत्तर प्रदेश व जंडियाला गुरु में बड़ी कार्रवाई

होशियारपुर- पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अंतर्राष्ट्रीय ड्रग व हवाला रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 20 किलो 700 ग्राम हैरोइन व 40 लाख 12 हजार रुपए ड्रग मनी सहित नशे...
article-image
दिल्ली , पंजाब , राष्ट्रीय , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश

महाकुंभ भगदड़ : 30 की मौत, 60 घायल, 17 घंटे बाद पुलिस ने कबूला

महाकुंभ में संगम तट पर मची भगदड़ में 30 लोगों की मौत हुई है. 60 लोग घायल हुए हैं। जिनका कुंभ क्षेत्र के सेक्टर-2 में बने अस्पताल में इलाज चल रहा है। प्रदेश के...
article-image
दिल्ली , पंजाब , राष्ट्रीय , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश

अतुल हत्याकांड : सांप को दो दिन रखा गया था भूखा, फिर पत्नी ने कॉमन करैत सांप से था डसवाया

मेंरठ : हस्तिनापुर में निजी स्कूल संचालक अतुल कुमार पंवार की हत्या में बड़ा खुलासा हुआ है। अतुल को उसकी पत्नी दामिनी ने कॉमन करैत सांप से डसवाया था। पैनल का गठन कर सांप...
article-image
हिमाचल प्रदेश

मुख्यमंत्री 21 नवंबर को करेंगे ‘जल तरंग जोश महोत्सव-2025’ का शुभारंभ : लुहणू में 100 करोड़ रूपए की विभिन्न विकासात्मक योजनाएं जनता को करेंगे समर्पित

एएम नाथ।  बिलासपुर, 18 नवम्बर: बिलासपुर जिला प्रशासन द्वारा 21 से 23 नवंबर तक गोविंद सागर झील के तट पर आयोजित किये जा रहे ‘जल तरंग जोश महोत्सव-2025’ की तैयारियों के संदर्भ में आज...
Translate »
error: Content is protected !!