तरनतारन 558 घटनाओं के साथ सबसे आगे, फिरोजपुर दूसरे स्थान पर; 85.10% धान कटाई पूरी होने के बाद भी नहीं थम रही आगजनी
पटियाला। पंजाब में धान कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की 4 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने के 2,347 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 40.37 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 23.05 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाओं को लेकर 1,942 खेतों का निरीक्षण किया गया। इनमें 868 स्थानों पर आग लगाए जाने की पुष्टि हुई। कुल 801 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 647 एफआईआर दर्ज की हैं, जबकि 723 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में लाल प्रविष्टियां की गई हैं। इसके अलावा 689 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं।
तरनतारन में सबसे ज्यादा घटनाएं
जिलेवार आंकड़ों में तरनतारन 558 मामलों के साथ पहले स्थान पर है। फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 घटनाएं दर्ज की गई हैं। पटियाला जिले में पराली जलाने के 110 मामले सामने आए हैं। यहां 21 एफआईआर दर्ज करने के साथ 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 35 हजार रुपये वसूल किए गए हैं।
85 फीसदी से अधिक कटाई के बाद भी नहीं थम रही आग
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में धान के कुल रकबे की 85.10 प्रतिशत कटाई पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन की ओर से निरीक्षण, जुर्माने और एफआईआर जैसी कार्रवाई के बावजूद खेतों में आग लगाने के मामलों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने सीएम मान पर लगाए आरोप
इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर धान कटाई और पराली जलाने को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है। सिरसा के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 30 अक्टूबर को 60 था, जो 4 नवंबर तक बढ़कर 377 पहुंच गया।
उन्होंने इस बढ़ोतरी के लिए पंजाब में पराली जलाने को जिम्मेदार बताया। सिरसा ने दावा किया कि पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार 77 प्रतिशत पराली जलाई जा चुकी है। उनका कहना है कि यह आंकड़ा मुख्यमंत्री भगवंत मान के पहले दिए गए बयानों से मेल नहीं खाता। हालांकि, पराली जलाने और दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
