भंम्मे कलां में 300 पुलिसकर्मियों की तैनाती; राजनीतिक नेताओं के पहुंचने पर थी रोक, परिवार को 50 लाख मुआवजा और पत्नी को नौकरी देने का ऐलान
मानसा। गांव भंम्मे कलां के नौजवान दलजीत सिंह का शुक्रवार को 10 दिन बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। चंडीगढ़ पीजीआई में पोस्टमार्टम के बाद उनकी बहन अमरजीत कौर एंबुलेंस से शव लेकर पैतृक गांव पहुंचीं। गांव के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस प्रशासन ने एसपी के नेतृत्व में करीब 300 पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी। अदालत ने अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेता के शामिल होने पर रोक लगाई थी।
दलजीत सिंह अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। वीरवार को बचत भवन पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और पत्नी को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था।
हत्या के बाद शव फेंकने का आरोप
पुलिस के अनुसार, दलजीत सिंह की हत्या करने के बाद शव को फेंका गया था। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इससे पहले शव का पोस्टमार्टम बठिंडा एम्स में करवाया गया था।
अंतिम संस्कार को लेकर परिवार में भी मतभेद सामने आए। दलजीत सिंह की बहन अमरजीत कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की सीबीआई जांच करवाने और शव परिवार को सौंपने की मांग की थी। अदालत ने पहले पीजीआई में पोस्टमार्टम करवाने और चंडीगढ़ में ही अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था। बाद में परिवार की अपील पर गांव में अंतिम संस्कार की अनुमति दे दी गई।
27 अक्टूबर को मिला था शव
जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर को दलजीत सिंह अपनी बाइक पर बेटी को स्कूल बस में बैठाने के बाद घर लौट रहे थे, लेकिन दोपहर तक घर नहीं पहुंचे। इसके बाद परिवार को गांव रामानंदी के रास्ते पर उनका शव पड़े होने की सूचना मिली।
दलजीत सिंह की पत्नी परमजीत कौर ने आरोप लगाया था कि उन्होंने नशा करना छोड़ दिया था। उनके मुताबिक, कुछ लोगों ने उन्हें बुलाया था और कथित तौर पर नशे की अधिक मात्रा लेने से उनकी मौत हुई। इसके बाद परिवार ने शव सिरसा-मानसा हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।
शव को लेकर मानसा में हुआ था टकराव
घटना की जानकारी मिलने पर परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह और लक्खा सिधाना भी गांव पहुंचे थे। वे शव को लेकर मानसा में चल रहे धरने की ओर रवाना हुए। रामदित्तेवाला चौक पर पुलिस की नाकाबंदी के दौरान दोनों पक्षों में टकराव हो गया।
पुलिस पार्टी पर हमला करने के आरोप में थाना सिटी-1 में 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसी दिन लक्खा सिधाना और मोहनजीत सिंह शेरों को गिरफ्तार करने के साथ कुछ अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया था।