प्रदेश के 200 स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड में स्थानांतरित करने का कर्मचारी संघ ने जताया विरोध

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धर्मशाला, 09 सितंबर । पीएमश्री योजना का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि बोर्ड में परिवर्तन करना। योजना में सीबीएसई बोर्ड से संबद्धता अनिवार्य नहीं है, राज्य बोर्ड भी इसके तहत कार्यान्वित हो सकता है।

यह बात हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी संघ के प्रधान सुनील शर्मा ने मंगलवार को संघ की ओर से बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा को ज्ञापन सौंपने के बाद यहां जारी एक प्रेस बयान में कही।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रदेश के 200 सरकारी स्कूलों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से हटाकर केंद्रीय माध्यमिक बोर्ड में स्थानांतरित करने पर विचार कर रही हैै, जिस पर कर्मचारी यूनियन ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश के 200 स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, तो इससे जहां प्रदेश सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा, वहीं ग्रामीण छात्रों के लिए भी कठिनाई होगी।

उन्होंने कहा कि एचपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक विशेषताओं को समाहित किया जाता है, जबकि सीबीएसई में यह स्थानीय दृष्टिकोण नहीं होता, जिससे विद्यार्थियों की स्थानीय पहचान और समझ कमजोर होगी।

उन्होंने कहा कि इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण छात्रों पर पड़ेगा। राज्य में बड़ी संख्या में छात्र हिंदी माध्यम में पढ़ते हैं। सीबीएसई का पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली मुख्यत: अंग्रेजी आधारित है, जिससे ग्रामीण व वंचित वर्ग के छात्रों को कठिनाई होगी। इसके चलते सीबीएसई का पाठ्यक्रम ग्रामीण, पिछडे और हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए अचानक लागू करना अनुचित होगा, जिससे वे मानसिक और शैक्षणिक दवाब में आ सकते हैं। इसके अलावा इस बदलाव का असर प्रतियोगी परीक्षाओं, अभिभावकों की आर्थिक क्षमता पर दवाब, शिक्षकों व कर्मचारियों की अस्थिरता व रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव, अनुभवहीनता और प्रशासनिक जटिलताएं, स्थानीय प्रशासनिक नियंत्रण का नुकसान होगा। इसके अलावा राज्य की स्वायत्ता का सम्मान को भी इससे ठेस पहुंचेगी।

उन्होंने कहा कि आंध्रप्रदेश और उत्तर प्रदेश में सीबीएसई की ओर अचानक स्थानांतरण से शिक्षा व्यवस्था अस्थिर हो चुकी है, जिसमें से आंध्र प्रदेश ने लगभग 1000 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में परिवर्तित किया था, उन्हें अब दोबारा से संबंधित राज्य के बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष से मांग की है कि वे उनकी आवाज को प्रदेश सरकार के साथ उठाएं और इन स्कूलों के होने वाले परिवर्तन को रोकें

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