प्रदेश में 2,56,870 किसान कर रहे हैं प्राकृतिक खेती, दूध उत्पादकों को 300 करोड़ रुपये किए गए वितरित : मुख्यमंत्री सुक्खू

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एएम नाथ। शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का प्रथम प्राकृतिक खेती राज्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने आज यहां कृषि विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को इस दिशा में पूर्ण दक्षता व लगन से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विभाग को कृषि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
उन्होंने प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिए कृषि विभाग में अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन उत्पादों की डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म पर बिक्री की संभावनाएं तलाशने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 2,56,870 किसान 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की नई पहलों के बाद प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जो किसान खेती छोड़ चुके थे, वे भी अब दोबारा खेती की ओर लौट रहे हैं और प्राकृतिक खेती में रुचि दिखा रहे हैं।
श्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों की एमएसपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी की जौ 80 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने के बाद प्रदेश में दूध उत्पादन तथा सहकारी डेयरी प्रणाली से जुड़ने वाले किसानों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। सरकार ने गाय के दूध का एमएसपी 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का एमएसपी 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत डेयरी किसानों के अलावा अधिक से अधिक किसानों को इस योजना का लाभ सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश के दूध उत्पादकों को 300 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल क्षेत्र को प्राकृतिक खेती पंचायत घोषित करने की सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बड़ा भंगाल क्षेत्र में उगाई जाने वाली राजमाह के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, सचिव कृषि सी. पॉलरासु, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक राम कुमार गौतम तथा कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
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