फर्जी राशन कार्ड और करोड़ों के घोटाले की खुली पोल : 28 लाख लोगों पर होगा ऐक्शन

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चंडीगढ़ ।पंजाब में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना  के तहत फ्री गेहूं का लाभ उठा रहे करीब 28 लाख राशन कार्डधारक परिवार अब इस योजना से वंचित हो सकते हैं. केंद्र सरकार द्वारा ई-केवाईसी  अनिवार्य किए जाने के बाद इन लाभार्थियों के नाम पोर्टल से हटाए जा रहे हैं। सरकार ने 30 जून 2025 तक ई-केवाईसी पूरा करवाने की अंतिम तारीख निर्धारित की है।

30 जून के बाद बंद हो सकता है फ्री राशन :  खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार जिन लोगों ने अब तक अपनी ई-केवाईसी पूरी नहीं करवाई है. उन्हें आगामी समय में योजना के तहत मुफ्त गेहूं नहीं मिलेगा. विभाग के अनुसार, 28,14,267 सदस्य ऐसे हैं. जिनका अब तक पंजीकरण नहीं हो पाया है और जिनके नाम डिलीट किए जा रहे हैं।

राशन डिपो और कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों का घोटाला :  विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार राशन डिपो होल्डर और खाद्य आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से लंबे समय से फर्जीवाड़ा किया जा रहा था. कई मामलों में मर चुके लोगों और फर्जी सदस्यों के नाम पर राशन कार्ड बनवाए गए और उनके नाम से सरकारी गेहूं की कालाबाजारी की जाती रही।

क्या है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना?

PMGKAY के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक पंजीकृत सदस्य को हर महीने 5 किलो गेहूं मुफ्त देती है। इसका मतलब है कि किसी राशन कार्ड में यदि 7 सदस्य दर्ज हैं, तो उस परिवार को 105 किलो गेहूं तीन महीनों में फ्री मिलता है. इस योजना का उद्देश्य गरीबों को भोजन सुरक्षा प्रदान करना है।

केवल 82% परिवारों ने पूरी की ई-केवाईसी प्रक्रिया

पंजाब में कुल 1.54 करोड़ सदस्य इस योजना से जुड़े हैं. लेकिन सिर्फ 1.26 करोड़ ने ही ई-केवाईसी पूरी करवाई है. शेष 18% लाभार्थी अब तक सिस्टम में रजिस्टर्ड नहीं हो पाए हैं. ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि इस 18% हिस्से की गेहूं की आपूर्ति भी नकली नामों पर निकाली जाती रही है.

डिपो होल्डरों का बचाव और सच्चाई

ई-केवाईसी की धीमी प्रक्रिया पर जब सवाल उठे तो डिपो होल्डरों ने सफाई दी कि कई राशन कार्डधारक प्रवासी हैं, जो अब उत्तर प्रदेश, बिहार या अन्य राज्यों में लौट गए हैं. इसलिए उनकी ई-केवाईसी नहीं हो पा रही है. लेकिन जांच में सामने आया है कि कई कार्डों पर फर्जी नाम दर्ज हैं और उन्हें आधार से जोड़े बिना राशन उठाया जा रहा है.

सिस्टम का दुरुपयोग

सरकार की कई बार री-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बावजूद राशन कार्डों में फर्जीवाड़ा थमा नहीं है. पुराने कार्डों में मृत लोगों के नाम, दोहरी प्रविष्टियां और नकली परिवार जोड़कर विभागीय कर्मचारी और डिपो संचालक सरकारी गेहूं को काला बाजार में बेचते रहे हैं.

केंद्र सरकार की सख्ती
अब केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 जून 2025 के बाद किसी भी लाभार्थी को ई-केवाईसी के बिना योजना का लाभ नहीं मिलेगा. ऐसे में जो लोग अब तक प्रक्रिया से चूके हैं. उनके नाम डाटा से हटाए जा रहे हैं और उन्हें फ्री गेहूं नहीं मिलेगा.

 

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