चंडीगढ़, 29 सितंबर। ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग के एक क्रिकेट मैच पर ऑनलाइन सट्टा लगाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन युवकों को जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में संजीव उर्फ सोनू, विक्रम सिंह और मनप्रीत सिंह शामिल हैं।
मामला करीब पांच साल पुराना है। सेक्टर-19 थाना पुलिस ने 13 दिसंबर 2021 को सेक्टर-18 स्थित एक मकान से तीनों युवकों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि वे बिग बैश लीग में मेलबर्न और ब्रिस्बेन के बीच खेले जा रहे मैच पर ऑनलाइन सट्टा लगवा रहे थे। पुलिस ने मौके से 47 हजार रुपये, छह मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य सामान बरामद करने का दावा किया था।
हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सका। बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट रमन सिहाग ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने जिस क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने का आरोप लगाया, उसके आधिकारिक शेड्यूल को अदालत में सबूत के तौर पर पेश ही नहीं किया।
मैच हुआ भी था या नहीं, बचाव पक्ष ने उठाया सवाल
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जब पूरा मामला एक विशेष बिग बैश लीग मैच पर सट्टा लगाने के आरोप पर आधारित था, तो पुलिस को उस मैच का आधिकारिक शेड्यूल भी रिकॉर्ड पर रखना चाहिए था। जिरह के दौरान जांच अधिकारी ने भी इस संबंध में हुई चूक को स्वीकार किया।
अदालत ने इस कमी को महत्वपूर्ण माना। बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि जब पुलिस 13 दिसंबर 2021 को छापेमारी की बात कह रही है, तो यह स्पष्ट करने के लिए भी ठोस दस्तावेज होना चाहिए था कि उस दिन वास्तव में संबंधित मैच खेला जा रहा था।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी नहीं कराई
मामले में पुलिस द्वारा बरामद किए गए छह मोबाइल फोन, लैपटॉप और प्रिंटर भी महत्वपूर्ण साक्ष्य थे, लेकिन इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। अदालत के समक्ष यह भी सामने आया कि ऑनलाइन सट्टेबाजी को साबित करने के लिए इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित कोई ठोस फोरेंसिक साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया।
अदालत ने माना कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के आरोप को साबित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते थे, लेकिन जांच एजेंसी की ओर से ऐसा ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।
इन कमियों और पर्याप्त सबूतों के अभाव में अदालत ने संजीव उर्फ सोनू, विक्रम सिंह और मनप्रीत सिंह को बरी कर दिया।
