भाजपा के ख‍िलाफ उतरे 25 दल : कहा मिलकर लड़ने का ऐलान, सड़क पर उतरकर बीजेपी की नाक में दम कर देंगे

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नई दिल्ली : भाजपा को मात देने के ल‍िए INDIA अलायंस के नेताओं की बहुप्रत‍िक्ष‍ित मीटिंग हुई. 25 दलों के नेता कमर कसकर उतरे. लगा क‍ि कुछ बड़ा फैसला होगा. साथ मिलकर लड़ने का ऐलान होगा. सड़क पर उतरकर बीजेपी की नाक में दम कर देंगे।

लेकिन घंटों की माथापच्‍ची के बाद जब 25 योद्धा फोटो सेशन के ल‍िए बाहर आए, फैसले बताने शुरू क‍िए तो लगा क‍ि पूरा का पूरा तरकश खाली है. कोई भी तीर ऐसा नहीं था, जो पहले न आजमाया जा चुका हो. हम आपको एक-एक फैसले की बानगी द‍िखाते है।

देश की इकोनॉमी डूब रही है. बेरोजगारी, महंगाई, किसानों और दबे-कुचले वर्गों के मुद्दे हैं, सरकार तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाए. इसके बाद खरगे ने INDIA अलायंस की मीटिंग में बनी सहमति की जानकारी दी. उन्‍होंने कहा क‍ि हमने 5 बड़े फैसले ल‍िए हैं, ज‍िन पर सभी 25 दल सहमत हैं. साथ काम करेंगे. फ‍िर उन्‍होंने एक-एक करके फैसले ग‍िनाए।

INDIA अलायंस के वो 5 फैसले

  1. SIR मुद्दे पर CJI को पत्र
    खरगे ने कहा, ये सहमति बनी है कि SIR और वोटर ल‍िस्‍ट में हेरफेर तथा चुनाव की निष्पक्षता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्‍ट‍िस को जल्‍द ही एक पत्र सौंपा जाएगा.सवाल ये क‍ि जो सुप्रीम कोर्ट SIR मुद्दे पर फैसला सुना चुका है. व‍िपक्ष की सारी दलीलें खार‍िज कर चुका है, फ‍िर उन्‍हीं सीजेआई को च‍िट्ठी ल‍िखने से क्‍या हास‍िल होगा? द‍िलचस्‍प बात ये है क‍ि खुद सीजेआई भी उस बेंच में थे, ज‍िसने एसआईआर पर फैसला सुनाया है।
  2. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
    खरगे ने दूसरा फैसला बताते हुए कहा, लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले अनेक गंभीर मुद्दों की स्थिति को देखते हुए ये सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके कार्यकाल में NEET और CBSE परीक्षाओं में लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है. नतीजा है कि आज लाखों युवा सड़कों पर खड़े हैं.अब सवाल ये क‍ि क्‍या इससे पहले कांग्रेस या व‍िपक्षी दल धर्मेंद्र प्रधान के इस्‍तीफे की मांग नहीं कर रहे थे. इसमें नया क्‍या है. राहुल गांधी, अख‍िलेश यादव, ममता बनर्जी समेत विपक्ष के तमाम नेता खुलकर धर्मेंद्र प्रधान पर आक्रामक रहे हैं. उनसे इस्‍तीफे की मांग करते रहे हैं. अब इससे नया क्‍या होगा, ये खरगे ने नहीं बताया।
  3. बेरोजगार-महंगाई और क‍िसानों के मुद्दे
    कांग्रेस अध्‍यक्ष ने कहा क‍ि वर्तमान में बढ़ती गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचार और किसानों के मुद्दों को हम उठाते रहेंगे. केंद्र सरकार को जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें हम इन सारे मुद्दों को उनके सामने रखेंगे.|यहां भी INDIA अलायंस के नेताओं ने वही घ‍िसा प‍िटा राग अलापा. बेरोजगार, महंगाई, क‍िसानों का मुद्दा और व‍िदेश नीत‍ि पर संसद के प‍िछले तीन सत्र पहले ही धुल चुके हैं. सड़कों पर प्रदर्शन होता रहा है. लेकिन अब व‍िपक्ष उससे ज्‍यादा आक्रामक कैसे द‍िखेगा, यह खरगे की बातों में कहीं नजर नहीं आया।
  4. हर दो महीने में मीटिंग
    खरगे ने कहा क‍ि INDIA गठबंधन के सभी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे. हमारी अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में होगी.ठीक इसी तरह की बात इससे पहले की कई मीटिंग के बाद कही गई, लेकिन अमल नहीं हुआ. 8 जून को हुई बैठक भी करीब एक साल बाद हुई. इससे पहले INDIA ब्लॉक की पिछली बड़ी बैठक 1 जून 2024 को दिल्ली में लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान से पहले हुई थी. तब 28 दल मीटिंग में शाम‍िल हुए थे, अब यह संख्‍या घटकर 25 रह गई है. यानी ताकत घटी ही है।
  5. संसद सत्र के पहले रोज मीटिंग
    मानसून सत्र के दौरान संसदीय समन्वय जारी रहेगा और हर सुबह नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी.खरगे जी को बताना चाह‍िए क‍ि क्‍या इससे पहले ऐसा नहीं होता था? संसद सत्रों से पहले फ्लोर स्ट्रैटेजी तय करने और कुछ साझा मुद्दों पर चर्चा के लिए नेताओं की छोटी-बड़ी बैठकें रोज होती रहीं. अगस्त 2025 में भी विपक्षी नेताओं की एक बैठक हुई थी, लेकिन उसे INDIA ब्लॉक की औपचारिक पूर्ण बैठक नहीं माना गया,क्‍योंक‍ि उसमें दलों की भागीदारी कम थी।

कोई बुआ-भतीजा वाद के लिए आया…

  • कांग्रेस के एक्‍स अकाउंट पर ही लोग र‍िएक्‍शन दे रहे हैं. एक यूजर ने ल‍िखा, ड्राइंग रूम डिस्कशन किसी चीज का समाधान नहीं हो सकता। खासकर राजनीति में. लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है लेकिन कोई बात समूह में ही कही जा सकती है।
  • एक अन्‍य यूजर ने ल‍िखा, INDIA Block- हारे हुए नेताओं का जमावड़ा. कोई परिवारवाद के लिए आया. कोई बुआ-भतीजा वाद के लिए आया. कोई आया है अपनी सीट बचाने, तो कोई आया है पार्टी का अस्तित्व बचाने. इन्हें ना देश के विकास से मतलब है, ना ही देश की संप्रभुता से मतलब है. बस अपनी दुकान चलनी चाहिए।

‘खानापूर्ति’ की कोश‍िश तो नहीं?

कहीं ऐसा तो नहीं क‍ि व‍िपक्ष को लग रहा हो क‍ि युवा नाराज हैं और उसका फायदा उठाने के ल‍िए साथ आ जाते हैं. साथ बैठ जाते हैं. मीटिंग कर लेते हैं, उन्‍हीं की बातें कर लेते हैं. और क‍िसी तरह एकजुट द‍िख जाएं. क्‍योंक‍ि इंड‍िया अलायंस की मीटिंग, उसमें शाम‍िल दलों के बयान और मीटिंग में ल‍िए गए फैसले साफ बयां कर रहे हैं क‍ि यह ‘खानापूर्ति’ से ज्‍यादा कुछ नहीं. अगर व‍िपक्ष आक्रामक नजर आता तो लोकतंत्र के ल‍िए शुभ संकेत होते. क्‍योंक‍ि जनता का भरोसा जीतना नहीं, कमाना पड़ता है।

 

 

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