पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जवाबदेही तय करने पर भी दिया जोर
चंडीगढ़, 22 अक्टूबर: पूर्व केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री और चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को संबोधित करते हुए, वैश्विक शांति, सुरक्षा और कूटनीति के मुद्दों पर भारत का पक्ष प्रस्तुत किया। इस दौरान अपने संबोधन में, तिवारी ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय आपराधिक ट्रिब्यूनलों के शेष कार्यों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय तंत्र की अध्यक्ष न्यायाधीश ग्रेसीला गाटी सांताना की दस्तावेज संख्या ए/81/287 में दर्ज रिपोर्ट के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं और इस तंत्र के अधिकार क्षेत्र को प्रभावी ढंग से लागू करने के उनके प्रयासों की सराहना करते हैं।
तिवारी ने कहा कि हम दोषियों को सजा से बचने से रोकने की लड़ाई में इस तंत्र के योगदान को स्वीकार करते हैं और न्याय, निष्पक्षता, स्वतंत्रता तथा उचित कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुरूप इसके अधिकार क्षेत्र से संबंधित कार्यों को पूरा करने के महत्व को दोहराते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय के हितों की रक्षा करना और पीड़ितों के अधिकारों को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है।
तिवारी ने कहा कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान इस तंत्र ने अपने न्यायिक और शेष कार्यों को पूरा करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। जैसे-जैसे यह संस्था अपने अधिकार क्षेत्र से संबंधित कार्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, हम इस बात पर जोर देते हैं कि न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता किए बिना और शेष जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाते हुए हस्तांतरण की प्रक्रिया कुशल, सुचारू और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
तिवारी ने जोर देते हुए, कहा कि भारत इस तंत्र द्वारा पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों को सहायता तथा ट्रिब्यूनल के रिकॉर्ड के संरक्षण और प्रबंधन सहित शेष कार्यों को जारी रखने के महत्व को रेखांकित करता है। ये कार्य विशेष उद्देश्यों के लिए स्थापित ट्रिब्यूनलों की विरासत को सुरक्षित रखने और निरंतर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
तिवारी ने कहा कि हम इस तंत्र, संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और संबंधित सदस्य देशों के बीच मौजूद कानूनी, प्रशासनिक तथा लॉजिस्टिक चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग के महत्व पर भी जोर देते हैं। इन कार्यों को संयुक्त राष्ट्र सचिवालय को सौंपने से संबंधित किसी भी प्रस्ताव में कानूनी स्पष्टता, जवाबदेही, संस्थागत निरंतरता तथा इससे जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक प्रभावों पर उचित ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने महासभा को संबोधित करते हुए, कहा कि इस तंत्र के रिकॉर्ड का संरक्षण और उन तक पहुंच सुनिश्चित करना ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण, शोध तथा न्याय के हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने और घरेलू स्तर पर क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से, इस तंत्र के अधिकार क्षेत्र के अनुरूप राष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों को निरंतर सहायता प्रदान करने के महत्व को भी स्वीकार किया।
तिवारी ने कहा कि नाइजर में बसाए गए, बरी किए गए और रिहा किए गए व्यक्तियों की स्थिति को लेकर भारत अब भी चिंतित है। इस संबंध में उन्होंने 21 नवंबर, 2025 को एक न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले का उल्लेख किया, जिसके अनुसार 31 दिसंबर, 2026 के बाद इस तंत्र पर इन व्यक्तियों को आगे वित्तीय सहायता प्रदान करने की कोई कानूनी या न्यायिक जिम्मेदारी नहीं रहेगी।
तिवारी ने कहा कि हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि वे ऐसा सहयोगात्मक और टिकाऊ समाधान तलाशें, जिससे संबंधित व्यक्तियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जा सके। उन्होंने सभी सदस्य देशों से भी अपील की कि वे न्याय और कानून के शासन के सिद्धांतों के अनुरूप इस तंत्र के अधिकार क्षेत्र से संबंधित कार्यों को समय पर और सुचारू रूप से पूरा करने के लिए रचनात्मक योगदान दें।
