मनुष्य के आंतरिक व बाहरी जगत के साथ जुडऩे में है बाणी व साहित्य की अनंतता: मदन वीरा

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– सरकारी कालेज तलवाड़ा के पंजाबी विभाग की ओर से श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित छठे आनलाइन वैबीनार का आयोजन
होशियारपुर: पंजाब सरकार के दिशा-निर्देशों पर एम.आर.पी.डी सरकारी कालेज तलवाड़ा के अलग-अलग विभागों के सहयोग से मई-जून माह के दौरान चलाई जा रहे श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित वैबीनार सीरिज के अंतर्गत पंजाबी विभाग की ओर से श्री गुरु तेग बहादुर जी के पंजाबी साहित्य को देन विषय पर छठे आनलाइन वैबीनार का आयोजन किया गया। इस वैबीनार में कंडी इलाके से पंजाबी के प्रसिद्ध लेखक व चिंतक मदन वीरा ने मुख्य वक्ता के तौर पर भाग लिया।
वैबीनार की शुरुआत में कालेज के प्रिंसिपल बी.आर राणा ने जहां वैबीनार के मुख्य वक्ता मदन वीरा का स्वागत किया वहीं वैबीनार से जुड़े अलग-अलग स्कूल, कालेजों, यूनिवर्सिटियों से विद्यार्थियों, श्रोताओं, पाठवों व खोजी विद्वानों का भी अभिनंदन किया। इसके साथ ही श्री राणा ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
वैबीनार के मुख्य वक्ता मदन वीरा ने कहा कि गुरु साहिब ने जहां अपने बलिदान द्वारा भारतीय संस्कृति को एक नए विचार से जोड़ा है, वहीं वैराज्य व भक्ति का उपदेश देकर लोगों को सांसारिक प्रपंच में उलझने से रोका है। उन्होंने सब किछु होत उपाय की दृढ़ता के माध्यम से उखड़े हुए मन वाले जिझासु को अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढऩे के लिए हमेशा हल्लाशेरी दी है। मदन वीरा ने बाणी व साहित्य की सांझीवालता को दर्शाते हुए कहा कि बाणी व साहित्य की अनंनता मनुष्य के आंतरिक व बाहरी जगत से जुडऩे में है।
वैबीनार के कन्वीनर प्रो. अजय कुमार ने वैबीनार के विषय के बारे में बताते हुए गुरु साहिब जी की बाणी के आधार पर कहा कि अन्याय के आगे झुकने या उसको स्वीकार न करने की बात कोई निर्भय व्यक्ति ही कर सकता है, डरे हुए के मन में इतनी हिम्मत नहीं हो सकती क्योंकि निर्भयता के पीछे वीरता की भावना काम कर रही होती है। वीरता की भावना ही भय को खत्म कर निर्भयता को जन्म देती है। इसी तरह गुरु साहिब के व्यक्तित्व में निर्भयता व वीरता की भावनाएं एकसाथ होकर चलती हैं। इसी लिए सांई बुल्ले शाह ने गुरु जी को गाजी(शूरवीर) कहा है।
वैबीनार के अंत में पंजाबी विभाग के प्रमुख डा. सुरजीत सिंह ने वैबीनार में हुई विचार चर्चा को संक्षेप में बताते हुए मुख्य वक्ता मदन वीरा का तहे दिल से धन्यवाद किया वहीं वैबीनार से जुड़े कालेज से प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, प्रोफेसर साहिबान व अन्य स्कूलों, कालेजों से जुड़े खोजी विद्वानों का भी धन्यवाद किया व विशेष तौर पर कन्वीनर प्रो. अजय कुमार अर्श को मदन वीरा जैसे बुद्धिजीवियों को पाठकों से रुबरु करने के लिए करवाए जा रहे आनलाइन वैबीनारों को सुचारु रुप में चलाने के लिए बधाई भी दी।

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