चंडीगढ़, 13 दिसंबर: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने सुझाव दिया है कि रेत खनन की मंजूरी देने से पहले गांवों की पंचायतों की इजाजत लिए जाने को जरूरी किया जाना चाहिए।
आज लोकसभा में सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा कि हालांकि खनन खनिज विकास अधिनियम, जिसके तहत रेत खनन आता है, को राज्य सरकारों द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इस क्रम में, दो केंद्रीय मंत्रालयों, पर्यावरण और खनन ने 2017 में सस्टेनेबल सेंड माइनिंग (सतत रेत खनन) संबंधी गाइडलाइंस जारी की थीं। उन्होंने कहा कि इन गाइडलाइंस के अनुसार रेत खनन के लिए मंजूरी जिला पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन समिति द्वारा दी जाती है।
जिस पर, उन्होंने सुझाव दिया कि चूंकि संबंधित गांव जहां से रेत निकाली जाती है, वहां से कई टन वजन वाले वाहन निकलते हैं, जिसके चलते उन गांवों की सड़कों का बहुत नुकसान होता है। इसलिए संबंधित क्षेत्रों में खनन की अनुमति देने के लिए उनकी मंजूरी अनिवार्य की जानी चाहिए। तिवारी ने जोर देते हुए कहा कि रेत खनन से कई पर्यावरणीय और बुनियादी ढांचे के खतरे पैदा होते हैं और स्थानीय गांवों विशेषकर सड़कों को नुकसान होता है।
इस आल्सो पर सांसद तिवारी के सवाल का जवाब देते हुए, केंद्रीय कोयला, खनन और संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आश्वासन दिया कि खनन मंजूरी के लिए स्थानीय पंचायतों की मंजूरी को अनिवार्य बनाने के लिए गाइडलाइंस की समीक्षा की जाएगी।